भारत त्योहारों का देश है। जिस तरह एक बगीचे में सभी रंगों के पुष्प अपनी सुगंध और सुंदरता से सबका मन मोह लेते हैं, वैसे ही भारत भी अनेक धर्म, त्योहारों, वेशभूषा, बोली, खान-पान, रहन-सहन से हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर लेता है। इतनी विविधताओं के बीच भी माला के एक सूत्र की तरह एकता में बंधा मेरा देश यूँ ही महान नहीं कहलाता है!
रंगीले भारत के अनेक प्रसिद्ध पर्वों में से आज मैं यहाँ दक्षिण
भारतीय पर्व ओणम की बात कर रही हूँ। ओणम दक्षिण भारत के केरल में विशेष
धूमधाम के साथ मनाया जाता है। यह वहाँ का राजकीय पर्व भी है। ओणम 10 दिनों
तक मनाया जाने वाला त्योहार है। इस वर्ष यह 22 अगस्त,
2020 से प्रारम्भ होकर 2 सितंबर, 2020 तक मनाया जा रहा है। मान्यता है कि ओणम के दिन
ही राजा महाबली अपनी सम्पूर्ण प्रजा से मिलने के लिए पृथ्वी पर आते हैं। राजा महाबली
असुरराज थे, परंतु विष्णु के परम भक्त भी थे। इस त्योहार की कथा
विष्णु जी के वामन अवतार से जुड़ी है। यह कथा इस प्रकार है-
असुरराज महाबली दानी और दयालु थे। वे अपनी प्रजा से अत्यंत स्नेह
करते थे। वे असुरों के राजगुरु शुक्राचार्य की आज्ञा से 100 यज्ञ करके तीनों लोकों
पर प्रभुत्व जमाना चाहते थे। तब बलि के 99 यज्ञ पूर्ण करने के बाद सौवें यज्ञ से पहले
देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु वामन अवतार में बलि की परीक्षा लेते हैं, और दान में तीन पग भूमि माँगते हैं। बलि के द्वारा इसे देने का
संकल्प लेने पर वामन भगवान अपना पहला पग धरती, दूसरा पग स्वर्ग और तीसरा पग रखने के लिए स्थान मांगने पर बलि द्वारा
आगे किए उसके सिर पर पग रख देते हैं। वामन भगवान द्वारा तीसरा पग उसके सिर पर रखते
ही वह पाताल लोक में चला जाता है। इसके बाद बलि भगवान से वर्ष में एकबार अपनी प्रजा
से मिलने का वरदान माँगते हैं, जिसे विष्णु भगवान स्वीकार कर लेते हैं। तभी से यह
मान्यता है कि महाबली राजा अपनी प्रजा से मिलने थिरुओणम के दिन पृथ्वी पर आते हैं।
मलयाली लोग राजा बलि और विष्णु अवतार वामन भगवान का स्वागत करने के
लिए घरों की आकर्षक सजावट करते हैं। इस दिन 26 प्रकार के विशेष शाकाहारी व्यंजन
बनाकर, उन्हें केले के पत्ते पर सजाकर भगवान वामन और राजा महाबली को भोग
के रूप में अर्पित किए जाते है। इस तरह की तैयार की गई विशेष थाली को साध्या थाली
कहा जाता है। इसके साथ ओणम कृषि पर्व भी है। यह नई फसल के आने की खुशी में भी मनाया
जाता है। केरल में इन दिनों चाय, अदरक, इलायची, काली मिर्च, धान आदि फसल पाक कर तैयार हो जाती है। यह त्योहार भारत
के अनेक हिस्सों में मनाए जाने वाले हिन्दू त्योहार दशहरा और दीपावली के मिश्रित रूप
जैसा है। इसमें भी दिवाली की तरह घरों की साफ-सफाई और सजावट की जाती है। इसमें पहले
दिन से ही फूलों से चक्र के समान गोल रंगोली बनाई जाती है,
जिसे पूकलम कहा जाता है। पहले यह छोटी होती है परंतु आठ दिनों तक रोज इसके चारों
तरफ एक चक्र और बना दिया जाता है, जिससे यह एक विशाल रंगोली बन जाती है। 9वें दिन इसे
दीपक जलाकर सजाया जाता है और विष्णु की मूर्ति तथा गणपति की पूजा होती है। यह त्योहार
मंदिरों में जाकर नहीं अपितु घरों में रहकर ही मनाया जाता है। इस दिन विशेष पकवान बनाए
जाते हैं, विशेषकर चावल, गुड़ और नारियल के दूध को मिलाकर
खीर बनाई जाती है, जिसे पायसम कहा जाता है। ओणम पर सभी एक दूसरे
के गले मिलकर शुभकामना और बधाई भी देते हैं। इस दौरान सर्प नौका दौड़, कथकली नृत्य एवं अनेक
कार्यक्रमों का आयोजन भी होता है।
मलयालम पंचांग कोलावर्षं के अनुसार यह त्योहार प्रथम मास
छिंगम में मनाया जाता है। मलयाली हिन्दू धर्म के लोगों के लिए यह नव वर्ष का
आरंभ भी होता है। यह पर्व केरल के त्रिक्काकरा (कोच्ची के पास) एकमात्र वामन
मंदिर से प्रारम्भ किया जाता है। फूलों की चक्राकार रंगोली के चारों तरफ युवतियाँ
नृत्य भी करती हैं, जिसे तिरुवाथिरा कलि कहा जाता है। वामन अवतार
विष्णु को त्रिक्काकरप्पन नाम से जाना जाता है। राजा महाबली और उनके अंगरक्षकों
की प्रतिष्ठा की जाती है, जो कच्ची मिट्टी से बनाई जाती है। दसवें दिन विष्णु,
गणपति, बलि और अंगरक्षकों सभी मूर्तियों को पूजा करने के बाद विसर्जित
कर दिया जाता है।
इस तरह ओणम एक संपूर्णता से भरा हुआ त्योहार है जो समाज में समरसता की भावना, प्रेम और भाईचारे का संदेश देता है।


Introduction adbhut h or Onam parv ki jankaari bhi atyant manmohak roop m prastut ki gyi h..... Happy Onam to the readers
जवाब देंहटाएंThanks and Happy Onam
हटाएंभारत की अनेकता में एकता एवं उत्सव से सुसज्जित एक सुंदर पर्व की उत्तम जानकारी से ओतप्रोत आलेख हेतु सादर अभिनंदन
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