आज 12 जनवरी को विवेकानंद जी का जन्मदिवस है,
इसे हम ‘युवा दिवस’ के रूप में भी मनाते हैं।
विवेकानंद जी ने भारत में ही नहीं अपितु विदेशों में भी भारतीय धर्म की पताका लहराने
का कार्य किया। इन्होने युवावस्था में ही अमेरिका के शिकागो शहर में ‘विश्व धर्म सम्मेलन’ में भाग लेकर अपना विश्व प्रसिद्ध
भाषण हिन्दी में देकर भारत एवं भारतीय धर्म को एक अलग ही स्थान प्रदान किया था। आज
हम यहाँ उनके द्वारा दी गई शिक्षाएँ एवं आधुनिक समय में भी उनकी उपयोगिता पर प्रकाश
डालेंगे।
शिक्षाएँ और उनकी उपयोगिता-
1.
उठो,
जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त नहीं हो जाता।
उपयोगिता- आज की युवा पीढ़ी जब मुश्किलों से घबराने लगती है और हार मानने लगती
है, तब स्वामीजी की यह शिक्षा उनमें नया जोश भरने का कार्य करती है।
2.
सच्चा पुरुष
वही होता है जो हर परिस्थिति में नारी का सम्मान करे।
उपयोगिता- आधुनिक समय में चारों तरफ नारी के साथ होते अमानवीय व्यवहार को
देखते हुए यह शिक्षा अगर बालकों को बचपन से ही घर-परिवार-विद्यालय और समाज में दी जाए
तो नारी के प्रति होने वाले अपराध और बर्बरता स्वत: ही समाप्त हो जाएंगे।
3.
लक्ष्य
पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए।
उपयोगिता- यह शिक्षा विशेषत: विद्यार्थी वर्ग के लिए उपयुक्त है।
उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी सोशल नेटवर्किंग के जाल में फँस कर अपने
लक्ष्य पर ध्यान नहीं केन्द्रित कर पाते हैं और भटक जाते हैं। यह शिक्षा लेकर वे अपने
लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।
4.
हर आत्मा
ईश्वर से जुड़ी है, करना ये है कि हम इसकी दिव्यता को पहचानें।
उपयोगिता- आज चारों तरफ जब धर्म सांप्रदायिक लोगों के कारण अनेक
बार देश को कठिन वक्त से गुजरना पड़ता है, तब यह शिक्षा बालकों को बचपन से ही दी जानी चाहिए जिस
से वे सभी धर्मों का सम्मान करना सीखें और अपने धर्म पर भी अडिग रह सकें।
5.
एक विचार
लें और इसे ही अपनी जिंदगी का एकमात्र विचार बना लें। इसी विचार के बारे में सोचें,
सपना देखें और इसी विचार पर जीएं।
उपयोगिता- कभी-कभी युवा पीढ़ी एक साथ कई विचार लेकर असमंजस में होती है,
वो समझ नहीं पाती है कि उनको भविष्य में करना क्या है?
ऐसी परिस्थिति में स्वामीजी कि इस शिक्षा के द्वारा उनका उचित मार्ग-दर्शन किया जा
सकता है।
6.
एक समय
में एक काम करो और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमें डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ।
उपयोगिता- कई बार हम देखते हैं कि कुछ लोग एक ही समय में एक साथ कई कार्य
कर रहे होते हैं, इसके परिणामस्वरूप इन्हें उतनी सफलता नहीं मिल पाती
जितनी मिलनी चाहिए और यह कार्य भी उतना उच्च स्तर का नहीं हो पाता जितना होना चाहिए
था। तब व्यक्ति निराश भी हो जाता है, ऐसे में इस शिक्षा को अपना कर वह एक समय में एक ही
कार्य करके उसमें सफलता प्राप्त कर सकता है।
7.
एक अच्छे
चरित्र का निर्माण हजारों बार ठोकर खाने के बाद ही होता है।
उपयोगिता- कई बार अपने ऊपर आई मुसीबतों और संकटों से घबराकर व्यक्ति अपनी
अच्छाइयों को छोड़ने का प्रयास करता है। इस शिक्षा को जीवन में अपनाकर लोग अपनी अच्छाइयों
को बनाए रख सकते हैं।
8.
खुद को
कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है।
उपयोगिता- छोटी-छोटी असफलताओं को देखकर मनुष्य कभी-कभी घबरा जाता है और स्वयं
को कमजोर समझने लगता है। यह शिक्षा उनको खुद को कमजोर बनाने से बचाती है।
9.
जब तक आप
खुद पर विश्वास नहीं करते तब तक आप भगवान पर विश्वास नहीं कर सकते।
उपयोगिता- निराश और हताश इंसान अपने ऊपर विश्वास करना छोड़ देता है। यह शिक्षा
उसे बताती है कि ईश्वर का एक और नाम विश्वास भी है, इसलिए सबसे पहले स्वयं पर
विश्वास करो।
10.
चिंतन करो,
चिंता नहीं, नए विचारों को जन्म दो।
उपयोगिता- आज की युवा पीढ़ी में धैर्य और सहनशीलता नहीं है। उन्हें हर कार्य
का फल तीव्र गति से और तुरंत चाहिए होता है। ऐसे में किसी चीज का परिणाम देर से या
मनोनुकूल नहीं आता है तो वे तनाव और अवसाद में आ जाते हैं। इस परिस्थिति में स्वामीजी
की इस शिक्षा द्वारा उनको चिंता-मुक्त करते हुए चिंतन के लिए प्रेरित किया जा सकता
है। नए विचारों पर अमल किया जा सकता है।