दोस्तों! बचपन में सभी ने कॉमिक्स ज़रूर पढ़ी होगी। कॉमिक्स के पीछे बचपन में सभी दीवाने होते थे। कहाँ-कहाँ से कैसे-कैसे भी जुगाड़ करके भी कॉमिक्स जरूर पढ़ते थे। कॉमिक्स के अनेक सुपर हीरो होते थे, जिनको कॉमिक्स पढ़ते समय हम स्वयं जीने लगते थे। कॉमिक्स की कहानियाँ पढ़ते समय उनमें इतना खो जाते थे कि लगता था वो कल्पना नहीं हकीकत है। कल्पना की उस उड़ान में हम अपने आपको भी कहीं न कहीं उसके पात्रों में समन्वित कर लेते थे।
ऐसी ही काल्पनिक दुनिया के एक सुपर हीरो का नाम 'सुपरमैन' है। जी हाँ दोस्तों! आज हम दुनिया के सुपरमैन की बात कर रहे हैं। उसकी शक्तियाँ ऐसी थी कि कई बार व्यक्ति सोचता है कि उसके पास सुपरमैन की शक्तियाँ आ जाएँ तो वह पलक झपकते ही सब कुछ कर सकता है।
सुपरमैन अमेरिकी
कॉमिक्स बुक्स का महानायक है। इसके लेखक ज़ेरी सीगल एवं आर्टिस्ट जॉय शस्टर ने 30
जून 1938 को इसकी प्रथम कॉमिक्स 'एक्शन कॉमिक्स # 1' जारी की। अमेरिकी कॉमिक्स जगत में इसने ज़बरदस्त धूम मचा दी।
समाचार-पत्र, रेडियो टेलीविज़न, फ़िल्मों और वीडियो गेम
सभी जगह इसकी ही चर्चा, कहानी और ख़बरें आती थी। इसका प्रकाशन डी सी
कॉमिक्स द्वारा किया गया।
सुपरमैन की
शक्तियाँ उसे सुपर बनाती थी। जैसे-चमत्कारी शक्तियाँ, तीव्र गति, घाव का अपनेआप भर जाना, सूक्ष्म ध्वनि श्रवणता, जमा देने वाली बर्फीली श्वांस, लम्बी आयु, गुरुत्वाकर्षण के विपरीत उड़ने की शक्ति, आर-पार देखने की शक्ति, एक्स रे विज़न, बुद्धिमत्ता आदि इन्हीं
अनेक चमत्कारी शक्तियों के कारण ही यह सुपरमैन था।
इसकी नीली रंग की
पोशाक, लाल लबादा और
सीने पर लाल एवं पीले रंग का लिखा अंग्रेजी में एस (S) अक्षर के गढ़े शिल्ड वाला पहनावा भी इसे सुपर लुक देता है। आज भी बच्चे जब
स्कूल में फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में सुपरमैन बनते हैं, तो यह उनकी पसंदीदा पोशाक होती है।
सुपरमैन की उद्गम
कथाओं में उसे ब्रह्माण्ड के किसी काल्पनिक ग्रह क्रिप्टॉन का अंतिम वासी
कहा जाता है, जिसका वास्तविक नाम 'काल-एल' है। उसके वैज्ञानिक पिता 'ज़ोर-एल' ने उसे बचाने के लिए रॉकेट से पृथ्वी पर प्रक्षेपित
कर दिया था, क्योंकि उनका ग्रह क्रिप्टॉन नष्ट होना शुरू हो
जाता है।
पृथ्वी पर उसे
कैनसैस के कृषक परिवार द्वारा अपना लिया जाता है, और नाम दिया गया क्लार्क
केंट। वे इसे नैतिक शिक्षा एवं आदर्श सीख का पाठ पढ़ाते हैं। धीरे-धीरे उसे अपनी
सुपर शक्तियों का पता लगने लगता है और युवा होने पर वह गुप्त रूप से सुपरमैन के
रूप में मानवता की भलाई का संकल्प लेता है।
आज अगर सुपरमैन
मुझे कहीं मिल जाए तो मैं उससे यही कहूँगी-
'सुपरमैन सुपरमैन, जल्दी से अब आ जाओ।
आकर तुम दुनिया
से, कोरोना को ले जाओ।'
सीमा शर्मा






