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गुरुवार, 27 अगस्त 2020

पार्श्व गायक-मुकेश

 

      इक दिन बिक जाएगा माटी के मोल, जग में रह जाएंगे प्यारे तेरे बोल जी हाँ दोस्तों! इस गाने के एक-एक बोल की सच्चाई को हम में से कोई भी नकार नहीं सकता है। इस गाने को गाते समय स्वर्गीय मुकेश जी ने शायद नहीं सोचा होगा कि दुनिया से उनके जाने के बाद भी वो अपने गाये गानों के माध्यम से हमेशा अपने चाहने वालों के दिलों में जिंदा रहेंगे। दोस्तों! आज पार्श्व गायक स्वर्गीय मुकेश जी की पुण्यतिथि है। आज हम उन्हें उनके हिन्दी बॉलीवुड जगत में दिए मधुर गायन के योगदान के लिए स्मरण-रूपी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

       इनका जन्म लुधियाना में 22 जुलाई 1923 में हुआ था। इनके पिताजी का नाम श्री जोरावर चंद माथुर और माताजी का नाम श्रीमति चाँद रानी था। इनका पूरा नाम मुकेश चंद माथुर था, परंतु हिन्दी बॉलीवुड जगत में ये केवल मुकेश के नाम से ही विख्यात हुए। बचपन से ही इनकी संगीत में रुचि थी। इनके घर पर इनकी बड़ी दीदी संगीत कि शिक्षा ग्रहण करती थी, तब ये बड़े मन से उसे सुनते रहते थे। इनकी आवाज बहुत मधुर थी। एकबार ये अपनी दीदी के विवाह में गीत गा रहे थे, तब इनके एक संबंधी मोतीलाल ने इनकी आवाज सुनी। मोतीलाल मुकेश की आवाज से बहुत प्रभावित हुए और उन्हें अपने साथ मुंबई ले आए। मुंबई में ही मुकेश ने मोतीलाल के घर पर रहते हुए संगीत की विधिवत शिक्षा लेना प्रारम्भ किया, और गाने का भी अधिक अभ्यास करने लगे।

       मुकेश की इच्छा गायक से अधिक अभिनेता बनने की थी। वो फिल्मों में अभिनय भी करना चाहते थे। उन्हे इसका अवसर भी मिला। यह अवसर ही इनका पहला काम भी था, जो इन्हें 1941 में फिल्म निर्दोष में गायक और अभिनेता के रूप में प्राप्त हुआ। पर दुर्भाग्यवश यह फिल्म चली नहीं। इसके बाद 3-4 साल मुकेश के लिए संघर्षपूर्ण रहे, परंतु उन्होने हार नहीं मानी। 1945 में फिल्म पहली नजर में इन्होने बतौर पार्श्व गायक पहला गाना दिल जलता है तो जलने दे गाया, जो अभिनेता मोतीलाल पर फिल्माया गया था। यह गीत मुकेश ने अपने आदर्श गायक के.एल.सहगल के लहजे में गाया था। के.एल.सहगल ने जब यह गाना सुना तो वो समझ नहीं पाए कि यह गाना उन्होने स्वयं नहीं बल्कि किसी और ने बिलकुल उनके ही जैसे गाया है। मुकेश ने बड़ी ही खूबसूरती से इस गाने को हूबहू के.एल.सहगल के ही ढंग से गाया था। के.एल.सहगल को उनका गाना बहुत पसंद आया।

       इसके बाद तो मुकेश को काम मिलना प्रारम्भ हो गया। 1959 में आई फिल्म अनाड़ी के एक गाने सब कुछ सीखा हमने न सीखी होशियारी ने तो धूम ही मचा दी, जो राजकपूर पर फिल्माया गया था। इस गाने के लिए उन्हे सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक का फिल्म फेयर अवार्ड भी मिला। संगीतकार नौशाद के साथ उनकी जोड़ी ने कई सुपरहिट गाने फिल्म इंडस्ट्री को दिए। दिलीप कुमार के लिए इन्होने सबसे ज्यादा गाने गाये। इसके बाद 50 के दशक में इन्हें अपने सबसे अच्छे दोस्त और दिग्गज कलाकार राजकपूर की आवाज के रूप में भी जाना जाने लगा। कई बार राजकपूर जी ने स्वयं अपने इंटरव्यू में कहा कि मैं तो बस शरीर हूँ, मेरी आवाज तो मुकेश है।

       पार्श्व गायन करते-करते इन्होने 1951 में फिल्म मल्हार और 1956 में फिल्म अनुराग का निर्माण भी किया। इन फिल्मों में इन्होने अपने अभिनय की ख़्वाहिश पूरी करने के लिए हीरो का किरदार भी निभाया, पर ये फिल्में बॉक्स-ऑफिस पर नहीं चली। इसके कारण मुकेश को आर्थिक संकट के दौर से भी गुजरना पड़ा। अब मुकेश को अपनी भूल का एहसास हो गया और उन्हें समझ आ गया कि वे हीरो और प्रोड्यूसर के रूप में सफल नहीं हो सकते, इसलिए उन्होने वापस गायकी की तरफ रुख किया। गायकी में तो वो सफल हो ही चुके थे और अब उच्च शिखर पर पहुँचने लगे। अब उन्होने अपनी गायकी में ही नए-नए प्रयोग करना शुरू किया। वे अलग-अलग अभिनेता के अनुसार अलग-अलग ढंग से गायन करने लगे। उन्होने दिलीप कुमार और राज कपूर के साथ-साथ सुनील दत्त, मनोज कुमार, विनोद मेहरा, फिरोज खान आदि अभिनेताओं के लिए भी गाने गाए। अब वे संगीतकार नौशाद के साथ-साथ कल्याणजी-आनंदजी, एस.डी.बर्मन, शंकर-जयकिशन, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल जैसे सभी चोटी के संगीतकारों के साथ काम करने लगे। इनके साथ काम करते हुए इन्होने कई सुपर-डुपर हिट गाने दिए और अनेक पुरस्कार भी जीते।

       इन्हें गायन के लिए चार बार फिल्म फेयर अवार्ड मिला। इन्होने अपना अंतिम गीत चंचल शीतल निर्मल कोमल फिल्म सत्यम् शिवम् सुंदरम् के लिए गाया, जो इनके बहुत अच्छे दोस्त राजकपूर की फिल्म थी। परंतु यह फिल्म 1978 में जब रिलीज़ हुई तो उससे 2 साल पहले ही 27 अगस्त 1976 को मुकेश का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। मुकेश उस समय सुर-साम्राज्ञी लता मंगेशकर जी के साथ किसी कार्यक्रम के लिए अमेरिका के डेट्रॉयट शहर में गए हुए थे। वहीं पर अचानक हार्ट-अटैक से उनका स्वर्गवास हो गया। बाद में उस कार्यक्रम में लताजी के साथ मुकेश जी के सुपुत्र नितिन मुकेश ने गाना गाया। वर्तमान में मुकेश के पुत्र नितिन मुकेश के साथ-साथ उनकी तीसरी पीढ़ी नील नितिन मुकेश भी बॉलीवुड जगत में सक्रिय है। नितिन मुकेश जहाँ अपने पिता की तरह पार्श्व-गायक हैं, वहीं नील नितिन मुकेश में अपने पितामह मुकेश जी के अभिनय के गुण है और वो फिल्मों में अभिनय करते हैं।

       यूँ तो मुकेश ने अनेक उम्दा गाने गाए हैं, पर हम उनमें से कुछ सुपर-डुपर हिट गानों की यादों को ताज़ा करते हैं-      

1.   मेरा जूता है जापानी- आवारा

2.   ये मेरा दीवानापन है- यहूदी

3.   किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार- अंदाज

4.   ओ जाने वाले हो सके तो लौट के आना- बंदिनी

5.   दोस्त दोस्त न रहा- संगम

6.   जाने कहाँ गए वो दिन- मेरा नाम जोकर

7.   मैंने तेरे लिए ही सात रंग के सपने- आनंद

8.   इक दिन बिक जाएगा माटी के मोल- धरम-करम

9.   कभी-कभी मेरे दिल में खयाल आता है- शीर्षक गीत

10. दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन- तीसरी कसम

11. जिस देश में गंगा बहती है- शीर्षक गीत

12. मैं पल दो पल का शायर हूँ- कभी-कभी

13. सब कुछ सीखा हमने न सीखी होशियारी- अनाड़ी

14. जीना यहाँ मरना यहाँ- मेरा नाम जोकर

15. चंचल शीतल निर्मल कोमल- सत्यम् शिवम् सुंदरम्


महान गायक




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