राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा 25 अगस्त से 8 सितंबर तक प्रत्येक वर्ष आयोजित किया जाता है। इसे आयोजित करने का प्रमुख उद्देश्य है- स्वैच्छिक नेत्रदान के प्रति जन-जागरूकता फैलाना और नेत्रों की सही देखभाल के बारे में लोगों को बताना। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को इसके बारे में पता नहीं होता है। वहाँ आँखों की देखभाल के प्रति लोग गंभीर नहीं होते हैं। नेत्रदान के बारे में या तो उनको जानकारी नहीं होती है अथवा कुछ लोगों को हो तो भी वे नेत्रदान में रुचि नहीं दिखते हैं।
कॉर्निया से होने वाली आँखों की खराबी का एकमात्र इलाज़ नेत्रदान ही
है। कॉर्निया किसी बीमारी या आँखों में चोट लगने के कारण भी क्षतिग्रस्त हो सकता है।
इस तरह की स्थिति में खराब कॉर्निया को निकाल कर स्वस्थ कॉर्निया प्रत्यारोपित करके
आँख को रोशनी प्रदान की जाती है। देखने का अधिकार भी मनुष्य के प्रमुख अधिकारों में
से एक माना जाता है। जहाँ तक हो प्रयास किया जाता है कि कोई भी व्यक्ति दृष्टिहीन नहीं
हो, यदि हो तो उसकी आँखों का यथासंभव प्रयास और इलाज़ करवाया जाए और
उसे अंधता से छुटकारा दिलाया जाए।
नेत्रदान कोई व्यक्ति मृत्यु के पश्चात ही कर सकता है। इसके लिए या
तो वह अपने जीवनकाल में ही स्वैच्छिक नेत्रदान के लिए किसी स्वास्थ्य विभाग में स्वयं
को रजिस्टर करवा दे, अथवा मृत्यु के उपरांत उसके परिजन स्वास्थ्य विभाग
को सूचित करें और नेत्रदान की प्रक्रिया को पूरा किया जाए। सामान्यत: जिस परिवार के
सदस्य की मृत्यु होती है, उस परिवार के सदस्य उस समय इस हालत में नहीं होते हैं
कि वो ये सब कार्य कर सकें। ऐसे में उनके कुछ समझदार व सतर्क रिश्तेदार/दोस्त या समाजसेवक
आदि लोग इस बारे में उनसे बात करके आगे की प्रक्रिया को पूरा करने में एक जिम्मेदार
नागरिक की भूमिका अदा कर सकते हैं। ऐसे समय में लिया गया एक समझदारी भरा निर्णय किसी
के जीवन के अँधेरों को दूर कर उसका भविष्य प्रकाशमय बना सकता है।
नेत्रदान पखवाड़े को आयोजित करते हुये आँखों की उचित देखभाल के बारे
में भी बताया जाता है। इसके तहत बताया जाता है कि बच्चों को विटामिन-ए की खुराक देना
बहुत जरूरी होता है। बच्चों को सभी आवश्यक टीके अनिवार्य रूप से लगवाएँ। आँखों को चोट
लगने से बचाना चाहिए। बच्चों को किसी नुकीली या पैनी चुभने वाली चीज से दूर रखें। गलती
से भी वो ऐसी किसी वस्तु से न खेलें। आँखों में किसी भी प्रकार की खुजली,
लाली, दर्द या पानी आना महसूस हो तो तुरंत आँखों के डॉक्टर को दिखाएँ।
इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही न करें। यदि आँखों में कुछ धूल,
मिट्टी या तिनका गिर जाए तो उन्हें ज़ोर-ज़ोर से रगड़ें नहीं,
बल्कि साफ और ठंडे पानी से धोएँ। धोने से भी यदि लाभ न हो तो नजदीकी चिकित्सक को अवश्य
दिखाएँ।
इस तरह की कुछ बातों का ध्यान रखकर और लोगों को जागरूक करके हम भी
इस नेत्रदान पखवाड़े का हिस्सा बन सकते हैं। हमारे एक छोटे से प्रयास से किसी एक के
जीवन में भी रोशनी फैली, तो वह पल हमारे लिए अमूल्य होगा और हमारा प्रयास भी
सार्थक व सफल हो जाएगा।
आओ मिलकर करें संकल्प, और जागरूकता फैलाएँ।
नेत्रदान के लिए प्रेरित कर, अंधेरे जीवन में रोशनी लाएँ।
नेत्रदान-अंधेरे में रोशनी की एक किरण


त्याग एवं सेवा हेतु सुन्दर प्रेरक लेख
जवाब देंहटाएंDhanyawad
हटाएंAajkal online classes ke chalte aankhon ka vishesh dhyaan rkhna chahiye
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