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रविवार, 23 अगस्त 2020

उप-प्रधानमंत्री का पद

विश्व के सभी देशों में राष्ट्रपति/प्रधानमंत्री का पद होता है, जो वहाँ की पदासीन सरकार का शीर्ष नेता होता है। राष्ट्रपति/प्रधानमंत्री अपने देश के संविधान के निर्देशानुसार वहाँ की सरकार चलाते हैं। भारत में  राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों ही पद होते हैं। इन दोनों के अतिरिक्त एक पद और भी होता है- उप-प्रधानमंत्री। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के पद का भारतीय संविधान में उल्लेख है, परंतु उप-प्रधानमंत्री पद का संविधान में कहीं भी उल्लेख नहीं है, इसलिए यह संवैधानिक पद नहीं है। भारत के उप-प्रधानमंत्री भारतीय सरकार के मंत्रिमंडल के उपाध्यक्ष होते हैं, इस पद पर रहते हुए इनके पास कोई विशिष्ट शक्तियाँ भी नहीं होती हैं। प्रमुखत: इस पद का उपयोग गठबंधन सरकारों में मजबूती लाने के लिए किया जाता है। संवैधानिक नहीं होने के कारण सभी सरकारों में उप-प्रधानमंत्री हो, यह अनिवार्य भी नहीं होता है। भारत के प्रथम उप-प्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल थे। इस पद पर अंतिम व्यक्ति श्री लालकृष्ण आडवाणी जी रह चुके हैं। वर्तमान सरकार में कोई उप-प्रधानमंत्री नहीं है। आइए आज हम देखते हैं कि भारत में अब तक कितनी बार और कौन-कौन उप-प्रधानमंत्री रह चुके हैं-

1.   सरदार वल्लभ भाई पटेल- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से 15 अगस्त 1947 से 15 दिसंबर 1950 मृत्यु पर्यंत इस पद पर रहने वाले प्रथम व्यक्ति थे।

2.   मोरारजी देसाई- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से 21 मार्च 1967 से 6 दिसंबर 1969 तक इस पद पर रहे थे।

3.   चौधरी चरण सिंह- जनता पार्टी से 28 जुलाई 1979 से 9 अक्तूबर 1979 तक इस पद पर रहे थे।

4.   जगजीवन राम- जनता पार्टी से 9 अक्तूबर 1979 से 10 दिसंबर 1979 तक इस पद पर रहे थे।

5.   यशवंत राव चव्हाण- जनता पार्टी से 10 दिसंबर 1979 से 14 जनवरी 1980 तक इस पद पर रहे थे।

6.   चौधरी देवीलाल- जनता दल से 19 अक्तूबर 1989 से 21 जून 1991 तक इस पद पर रहे थे।

7.   लालकृष्ण आडवाणी- भारतीय जनता पार्टी से 29 जून 2002 से 20 मई 2004 तक इस पद पर रहे थे।

   साधारणत: उप-प्रधानमंत्री के पास कोई अन्य विभाग भी होता है, जैसे- गृह मंत्रालय या वित्त मंत्रालय आदि। सामान्यत: इस पद का उपयोग सरकार के राजनीतिक स्थायित्व को सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है, क्योंकि भारतीय संविधान में प्रधानमंत्री को सर्वेसर्वा या पूर्ण शक्ति-सम्पन्न या एकाधिकार वाला व्यक्ति नहीं माना गया है। भारतीय संविधान कहता है कि प्रधानमंत्री पद पर बैठने वाला व्यक्ति समानों में प्रथम अर्थात् मंत्रिमंडल के सभी मंत्री समान हैं और प्रधानमंत्री उन सभी समानों में से प्रथम है। अत: उप-प्रधानमंत्री पद से शक्ति-संतुलन बना रहता है। इसके अतिरिक्त आपातकाल में भी इस पद कि नियुक्ति कि जा सकती है। उप-प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री कि अनुपस्थिति में कैबिनेट बैठकों कि अध्यक्षता करता है। प्रधानमंत्री कभी गंभीर बीमारी से ग्रस्त हो जाए, कार्यभार संभालने में अक्षम हो या उसकी असामयिक या अचानक मृत्यु हो जाए तो उप-प्रधानमंत्री ही प्रधानमंत्री का कार्यभार ग्रहण करता है।    



 भारत के अब तक के उप-प्रधानमंत्री

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