'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता' अर्थात् जहाँ नारियों की पूजा होती है, वहाँ देवता निवास करते हैं। यह बात सुनने में बहुत अच्छी लगती है, परन्तु आज़ादी के ७२ साल बीत जाने के बाद भी नारी-जाति को वो सम्मान अभी तक नहीं प्राप्त हुआ है, जिसकी वो अधिकारिणी है।
परन्तु अब शिक्षा के कारण नारी में अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता आई है। अब यदि उसका अधिकार उसे स्वतः या प्यार से नहीं मिलता है, तो वह उसे छीन भी सकती है।
अब वह उस पुरुष के हाथों का मात्र खिलौना बनकर नहीं रहेगी, जिसको उसने जन्म भी दिया है और जिसे प्यार करके उसने उसकी वंश-वृद्धि भी की है।
आज की सक्षम और शिक्षित नारी अपने नारी होने पर गर्वित है, वह सम्मान के साथ समानता का जीवन चाहती है।
इन्ही विचारों को शब्दों के रूप में उकेरित करती मेरी आज की कविता है-
मैं......... नारी......... हूँ
मैं......... नारी......... हूँ,
और अपने नारी होने पर गर्वित हूँ,
क्योंकि एक नारी, एक देवी का रूप है,
वह करुणा की मूर्ति है,
लज्जा उसका गहना है,
मातृत्व उसके त्याग का पुरस्कार है,
इसलिए मैं अपने नारी होने पर गर्वित हूँ।
परन्तु ये तो नारी-जीवन का एक ही पहलू है,
नारी के जीवन का दूसरा पहलू भी है।
वह नर द्वारा शोषित होती आई है।
मानसिक व शारीरिक रूप से,
आर्थिक व सामाजिक रूप से,
फिर भी वह उसको पोषित करती आई है।
नर ने तो मात्र उसे,
एक खिलौना बनाकर छोड़ दिया,
और उसे अपनी दासता में,
परतंत्र बनाकर जकड़ लिया।
पर आज की नारी सक्षम है,
अब उसमें जागृति आई है।
वह तो पुरुष को बस प्यार सिखाना चाहती है।
वह तो सम्मान के साथ समानता का अधिकार चाहती है।
अब यह कहावत मिथ्या है-
अबला तेरी यही
कहानी,
आँचल में है दूध, आँखों में पानी।
अब बात यह सत्या है-
नारी सहनशील है,
कमज़ोर नहीं,
वही तो दुर्गा, लक्ष्मी है कोई और नहीं।
सीमा शर्मा

अति सुंदर प्रसंग है यह कि नारी शब्द अपने अंदर एक अथाह सारांश को समेटे हुए हैं जिसके भीतर अनंत स्वरूप जैसे त्याग तपस्या ममता प्रेम करुणा जन्म शक्ति आदि भी मुख्य बिंदु हैं जो पृथ्वी नदी वृक्ष एवं ईश्वर के अंदर ही माने जाते हैं। अतः उसे किसी बराबरी की मात्र आवश्यकता नहीं है उसे आवश्यकता है मात्र अपनी संचित शक्ति के सदुपयोग हेतु शुभ संस्कारित सद शिक्षा की जिसके प्रभाव से वह तीनों लोगों एवं समस्त मानव समाज के लिए भी प्रेरणा स्रोत एवं पूजा शास्त्र शब्दों में भी एवं व्यवहार में भी रही है। हां समाज को भी अपनी तुच्छ वासनात्मक सोच का त्याग कर इस मातृ(शक्ति) का सम्मान करना चाहिये।
जवाब देंहटाएंहां, इसी कामना के साथ इन विचारों को पोस्ट किया है।
हटाएंनारी नर की पूरक हैं।नारी वंश बढाती हैं ।नारी घर की लक्ष्मी हैं ।नारी सदैव पूजनीय हैं। बहुत सुन्दर रचना मैम।
जवाब देंहटाएंसत्य वचन।
हटाएंधन्यवाद जी 🙏 कृपया अपना नाम भी लिखें तो कृपा होगी।🙏
आज की नारी सब पर भारी
जवाब देंहटाएंनर यदि शिव है तो नारी शक्ति है, दोनों के मेल से ही सृष्टि में सही सामंजस्य बना रह सकता है।
हटाएंआप भी कृपया अपना नाम अवश्य लिखें।🙏
Hr naari ko apne upar garv hona chahiye or jinhen nhi h, unhen yeh kavita padhni chahiye. Naari ke bina ye sansar adhoora h. Ishvar ne nar or naari dono ko samaan bnaya h fir samaaj bhed-bhav kyu krta h??
जवाब देंहटाएंEKDAM SAHI KHA AAPNE, NAR AUR NAARI ME SAMANTA KA BHAV HONA CHAHIYE
हटाएंनर और नारी मिलकर ही एक सम्पूर्ण सृष्टि का निर्माण करते हैं।
जवाब देंहटाएंSATYA VACHAN
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