मायका कह दो या
पीहर, यह ऐसा नाम है जो हर बेटी
को बचपन की यादों में डूबो देता है। २० साल जिस घर में माँ-बाप की लाड़ली बनकर
रहती है, एक दिन उस घर को छोड़कर
किसी दूसरे घर को सँवारने चली जाती है। पर अपने दिल में मायके की यादें सँजोए रखती
है।
जब-तब वो यादें उसे अतीत की मधुर स्मृतियों में ले जाती हैं। ऐसा ही एक समय
होता है- गर्मी की छुट्टियाँ। इन छुट्टियों का इंतज़ार हर विवाहिता पुत्री करती है,
क्योंकि अधिकतर बेटियाँ इसी समय मायके जाती हैं।
पर इस बार समय का मंज़र थोड़ा बदला-बदला सा है। इस बार कोरोना महामारी के कारण
बहुत सी बेटियाँ अपने मायके नहीं जा सकतीं। उन्हीं सब बेटियों के मन की पीड़ा मेरे
दिल में भी है। आखिर मैं भी तो एक बेटी ही हूँ, मैं भी तो पूरे
एक साल तक इन्हीं छुट्टियों का इंतज़ार करती हूँ, मायके जाती हूँ, माँ-पापा से मिलती हूँ।
सभी बेटियों के मनोभावों को कविता के माध्यम से शब्दों में पिरोने का मैनें
छोटा सा प्रयास किया है, जो इस कविता के
रूप में आपके सामने प्रस्तुत है-
माँ!
माँ! इन छुट्टियों में तेरी याद बहुत आई,
माँ! तुझे याद कर
मेरी आँख भर आई।
इस बार तुम मेरी यादों को सहेजना,
अपना प्यार नींद में सपनों के माध्यम से भेजना।
पुरानी तस्वीरों को देख आ गयी रुलाई,
माँ! तुझे याद कर मेरी आँख भर आई।
पापा को भी मेरी तरफ़ से दिलासा देना,
इस बार नहीं आ सकूँगी, ये भी बता देना।
विधना की मर्ज़ी के आगे किसकी है चल पाई,
माँ! तुझे याद कर मेरी आँख भर आई।
समय ने क्या करवट ली, सारे सपने टूटे,
लगता है जैसे मुझसे, ग्रह-नक्षत्र भी रूठे।
कैसी ये विवशता है? मैं मन-ही-मन कसमसाई,
माँ! तुझे याद कर मेरी आँख भर आई।
तू अपना और पापाजी का ख़याल अच्छे से रखना,
अगली बार ज़रूर आऊँगी, दिल छोटा ना करना।
पँख लगा के उड़ेगा समय, अगली छुट्टी भी ज़ल्दी आई,
माँ! तुझे याद कर मेरी आँख भर आई।
सीमा शर्मा

बहुत ही मार्मिक लेख।
जवाब देंहटाएंहां मैम, ऐसा होगा ये तो नहीं सोचा था। पूरा एक वर्ष हो चुका है। अब पता नहीं कब जाना होगा।
हटाएंदिल को छू गया मैम ।
जवाब देंहटाएंधन्यवाद मैम, परन्तु कृपया आप अपना नाम भी टिप्पणी के साथ लिखेंगे तो मुझे और अधिक प्रसन्नता होगी।🙏
हटाएंAtyant bhavnatmak rachna
जवाब देंहटाएंDHANYWAD
हटाएंमायका ही तो स्त्री की जड़ होती है, अत्यन्त भावुक लेख
जवाब देंहटाएंDHANYWAD
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