2020 तुम जाओ, ना अब तुमसे कुछ गिला है।
वह सब तुमने सिखाया, जो किसी से भी ना मिला है।
कहते हैं सब कि, तुम आए, कोरोना लाए।
रोजगार काम धंधे, सब तुमने
छुड़वाए।
सपने जो देखे, तुमने वह भी तुड़वाए।
तुम्हारी मार से, बचा ना कोई गांव-जिला है।
2020 तुम जाओ, ना अब तुमसे कोई
गिला है।
कितनों से तुमने उनके, अपने छीन लिए।
कितनों की छत छीनी, कितने घर-हीन किए।
कितने सेठ-साहूकार, तुमने दर-दीन किए।
कितनों का विश्वास डगमगाया और हिला है।
2020 तुम जाओ, ना अब तुमसे कुछ गिला
है।
माना तुमने सबको, बेड़ियों में
जकड़ दिया।
सारी दुनिया को डावांडोल, और गड़बड़ किया।
जैसे सब को समय ने ही, रोका और पकड़ लिया।
लगता हर दिन जैसे, रहस्य भरा एक किला है।
2020 तुम जाओ, ना अब तुमसे कुछ
गिला है।
लेकिन इन सबके अलावा, तुमने बहुत कुछ सिखाया है।
अनेकों एकाकी लोगों को, अब रिश्ते निभाना आया है।
निराशा के अंधेरे में तुमने, आशाओं का उजाला फैलाया है।
हर अंधेरी रात के बाद, सुनहरे प्रभात का सिलसिला है।
2020 तुम जाओ, ना अब तुमसे कुछ
गिला है।








