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मंगलवार, 15 सितंबर 2020

अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस

  भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। इसलिए लोकतंत्र का अर्थ जानने के लिए भारत से बेहतर कोई स्थान नहीं हो सकता। आज 15 सितंबर अर्थात अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस है। लोकतंत्र अर्थात जहां जनता को अपना नेता, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति आदि चुनने की स्वतंत्रता हो । अपने विचार व्यक्त करने की आजादी हो और अपने धर्म पर चलने की स्वतंत्रता हो। सरल भाषा में कहें तो हर तरह की आजादी हो, जब तक किसी दूसरे की आजादी को नुकसान न पहुंचता हो ।आज विश्व में लोकतंत्र दिवस मनाने का कारण भी यही है, क्योंकि आजादी हर किसी को पसंद होती है। हिंदी में कहा भी गया है-

'पराधीन सपनेहु सुख नाहीं' अर्थात गुलामी या परतंत्रता में तो सपने में भी सुख नहीं है।

  अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस की शुरुआत कब और क्यों हुई? वर्ष 2007 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस दिवस को मनाने की घोषणा की। इसका प्रमुख उद्देश्य लोकतंत्र का प्रचार करना और इसके प्रचार-प्रसार के लिए किए जाने वाले राष्ट्रीय कार्यक्रमों में मजबूती लाना है। इसके माध्यम से विश्व को सुशासन की सौगात देना भी है ।लोकतंत्र की परिभाषा के रूप में सभी ने विद्यालय शिक्षा में पढ़ा है । सबसे प्रसिद्ध परिभाषा अब्राहम लिंकन की है जो प्रत्येक व्यक्ति को याद है- "लोकतंत्र जनता का, जनता के द्वारा, जनता के लिए किया जाने वाला शासन है" लेकिन इसका मतलब सिर्फ इतना ही नहीं है। इसको हम व्यापक अर्थ में ले सकते हैं , जैसे किसी भी राष्ट्र में रहने वाले व्यक्तियों को समाज में समान अवसर प्राप्त    हों और सभी देशवासी अपने समाज की राजनीति में एक समान भागीदार बनें। इस तरह इसका अर्थ सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक रूप में व्यापक हो जाता है।

    विश्व में दो प्रकार की लोकतंत्र प्रणाली प्रचलित है -प्रथम संसदीय प्रणाली और दूसरी और द्वितीय राष्ट्रपति शासन प्रणाली। दोनों ही प्रणालियों में प्रजा अपने मताधिकार का प्रयोग अपने देश का जनप्रतिनिधि चुनने के लिए करती है । वह जनप्रतिनिधि चुने जाने के पश्चात अपने देश की प्रजा के लिए कार्य करने को प्रतिबद्ध होता है। भारत , कनाडा , इंग्लैंड , ऑस्ट्रेलिया आदि राष्ट्रों में संसदीय शासन प्रणाली लागू है , जबकि अमेरिका और कुछ अन्य राष्ट्रों में राष्ट्रपति शासन प्रणाली अपनाई गई है । जैसा कि नाम से ही परिलक्षित हो रहा है कि राष्ट्रपति शासन प्रणाली में सभी अधिकार एवं निर्णय राष्ट्रपति द्वारा लिए जाते हैं , जबकि संसदीय शासन प्रणाली में शक्ति राष्ट्रपति के पास नहीं होती है। इसमें संसद के दोनों सदनों और विशेषकर प्रधानमंत्री के मंत्रिमंडल अर्थात लोकसभा सदस्य आदि से विचार विमर्श के बाद अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री द्वारा लिया जाता है।

   भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र वाला देश है । यहां लगभग 60 करोड़ से भी ज्यादा लोग अपने मताधिकार का प्रयोग करके अपने जनप्रतिनिधि एवं सरकार का चुनाव करते हैं। लोकतंत्र ही वह धागा है जिसने इतने बड़े राष्ट्र को इतनी विविधताओं के पश्चात भी एक सूत्र में पिरो कर रखा है। यहां पर जो लोग सरकार की नीतियों या कार्यों से संतुष्ट नहीं हों तो शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख कर अपना विरोधी या असहमति जता सकते हैं।

    वर्ष 2020 जब दुनिया में कोरोना महामारी का संकट है , ऐसे में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस द्वारा कहा गया यह वक्तव्य अत्यंत महत्वपूर्ण है "ऐसे समय में जब पूरा विश्व कोविड-19 से जूझ रहा है , लोकतंत्र सूचना का मुक्त प्रवाह है। निर्णय लेने में भागीदारी और महामारी की प्रतिक्रिया के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।"

     इस वर्ष की अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस की थीम भी कोरोना को भी ध्यान में रखकर निश्चित की गई है -'कोविड-19 लोकतंत्र पर एक स्पोट-लाईट'

    कोरोना महामारी की आपदा से विश्व भर में सामाजिक,  राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक , शारीरिक , शैक्षिक , मानसिक और कानूनी चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है, ऐसे में प्रत्येक राष्ट्र इस संकट से उबरने के रास्तों को अपना रहा है ।  इस समय यह अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है कि इस संकट के समय में सभी राज्य एवं प्रदेश कानून एवं शासन को सुचारू बनाए रखें । आधारभूत सिद्धांतों की रक्षा एवं सम्मान करते रहे और विधि, इलाज एवं बचाव और न्याय एवं कानून की उचित प्रक्रिया का उपयोग करने का अधिकार सभी को प्रदान करें।

जनता जनार्दन की ताकत

 

4 टिप्‍पणियां:

  1. लोकतंत्र की परिभाषा समस्त राष्ट्र के लिए कल्याणकारी ही होती है चिंटू व्यवहार में अभी उस पर बहुत कुछ होना बाकी भी है क्योंकि बिना अनुशासन के-इमानदारी के,- कर्तव्य निष्ठा के कभी भी लोकतंत्र सफल नहीं होता अपितु वह भ्रष्ट तंत्र होकर रह जाता है जिसका दुष्परिणाम समस्त राष्ट्र को अथवा उसके सामान्य जनमानस को भोगना पड़ता है जो वर्तमान में भारत में बहुत अधिक है इसलिए वास्तविक लोकतंत्र को हम सभी को जानना मानना एवं अनुपालना करनी चाहिए

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    1. इसलिए ही तो लोकतंत्र वहीं तक आजादी देता है जहां तक दूसरे की आजादी भंग नहीं हो।

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  2. Democracy is what we need to work with our best potential. World should be democratized!

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