‘रूप तेरा मस्ताना, पल-पल दिल के पास, मेरे सामने वाली खिड़की में, मेरे सपनों की रानी, एक
लड़की भीगी-भागी सी, पाँच रुपया बारह आना, छूकर मेरे मन को, ड्रीम गर्ल,
जिंदगी एक सफर है सुहाना, आपकी आँखों में कुछ, तेरे चेहरे में वो जादू है, ऐ मेरे दिल के चैन, तेरे
चेहरे से नजर नहीं हटती, प्यार दीवाना होता है, सागर जैसी आँखों वाली, ये
शाम मस्तानी, कह दूँ तुम्हें या चुप रहूँ, चलते-चलते, फूलों के रंग से......’ आदि सदाबहार गानों को पढ़कर
आप समझ ही गए होंगे कि मैं किसके बारे में बात कर रही हूँ। जी हाँ दोस्तों! आप सही
समझे! आज यहाँ मैं बात कर रही हूँ हिन्दी फिल्म जगत के ‘हरफनमौला कलाकार स्वर्गीय किशोर कुमार’ जी के बारे में।
किशोर कुमार का जन्म 4 अगस्त 1929 को खंडवा, मध्यप्रदेश में हुआ था। इनके पिता कुंजीलाल प्रसिद्ध वकील थे। किशोर कुमार का असली नाम
‘आभास कुमार गांगुली’ था। इनके बड़े भाई ‘अशोक कुमार’ भी फिल्म जगत के
जाने-माने कलाकार थे। फिल्म जगत में आने के बाद ये ‘किशोर दा’ के नाम से भी जाने जाते रहे हैं। किशोर दा ऑल
राउंडर थे, वे गायक,
अभिनेता और निर्देशक भी थे।
मैं आपको इनके प्रसिद्ध गाने ‘पाँच
रुपया बारह आने’ से जुड़ा एक रोचक प्रसंग बताती हूँ। किशोर दा ने
कॉलेज कि पढ़ाई इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज से की थी। वे वहाँ की कैंटीन से उधार
लेकर खुद भी खाते थे और दोस्तों को भी खिलाते थे। ऐसा करते-करते कैंटीन वाले के
पास उनकी 5 रुपए 75 पैसे की उधारी हो गई, जो उस समय बड़ी रकम हुआ करती थी। कैंटीन वाला जब भी
उनसे उधारी का तकाजा करता तब वे कैंटीन की टेबल पर ही गिलास-चम्मच बजा-बजाकर
अजीब-अजीब धुन में पाँच रुपया बारह आना गाने लगते थे। आगे जाकर इस गाने और धुन को
इन्होने बड़े ही सुंदर ढंग से फिल्म के गाने में इस्तेमाल किया।
अभिनय के क्षेत्र में 1946 में फिल्म ‘शिकारी’ से इनकी शुरुआत हुई। इसमें इनके बड़े भाई अशोक
कुमार भी प्रमुख भूमिका में थे। गायक के रूप में इन्हें सर्वप्रथम 1948 में फिल्म ‘जिद्दी’ में ‘देवानन्द’ के लिए गाने का अवसर मिला।
यह गाना इन्होने ‘के.एल.सहगल’ के फैन होने के कारण
उन्हीं की शैली में गाया। गाना तो हिट हुआ, परंतु इससे इन्हें पहचान और काम नहीं मिला। इसके
बाद इन्होने और भी कुछ फिल्मों में काम किया और गाने गाए,
लेकिन वह पहचान और सफलता नहीं मिली जो मिलनी चाहिए थी। फिर 1957 ई. में ‘फंटूस’ फिल्म के ‘दुखी
मन मेरे’ गीत ने सबका ध्यान किशोर कुमार की तरफ खींच लिया।
सभी को उनकी प्रतिभा का लोहा मानना पड़ा। इसके बाद तो इनके एक के बाद एक कई हिट
गाने और फिल्में आती गईं।
1940-80 के 40 साल के करियर में किशोर दा ने 574 से भी
ज्यादा गाने गाए। किशोर दा ने न केवल हिन्दी फिल्मों में बल्कि तमिल, मराठी, असमी, गुजराती, कन्नड़, भोजपुरी, मलयालम और उड़िया फिल्मों के लिए भी गाने गाए। किशोर कुमार को 8 ‘फिल्म फेयर पुरस्कार’ मिले। उन्होने ‘देवानन्द से लेकर राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन’ तक के लिए गाने गाए। उन्होने 81 फिल्मों में अभिनय किया और
18 फिल्मों का निर्देशन भी किया। इनके दोनों बेटे ‘अमित कुमार और सुमित कुमार’ भी संगीत के क्षेत्र में ही कार्यरत हैं।
किशोर कुमार मस्त-मौला गायक और अभिनेता थे। ऐसा ही किरदार
उन्होने फिल्म ‘पड़ोसन’ में निभाया था। वह किरदार इनकी वास्तविक जिंदगी से
मिलता-जुलता ही था। ‘सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर जी’ के नाम से इंदौर सरकार द्वारा ‘लता मंगेशकर पुरस्कार’ दिया जाता है,
जो 1985 में किशोर दा को मिला। 13 अक्तूबर 1987 को इनका देहांत हो गया और
एक हरफनमौला कलाकार की जगह खाली हो गई। इसके बाद मध्यप्रदेश सरकार ने इनके सम्मान
में इनके नाम से ‘किशोर कुमार सम्मान’ पुरस्कार भी दिया जाने लगा।
सीमा शर्मा
![]() |
| मस्त-मौला किशोर दा |


बहुमुखी प्रतिभा के धनी की अच्छी बातें आलेख के माध्यम से
जवाब देंहटाएंधन्यवाद
जवाब देंहटाएंऔर भी ऐड हो सकता था जैसे किशोर कुमार की निजी पारिवारिक ,उनकी पत्नी के बारे में,उनके बचपन , उनके पिता के बारे में ,वह फिल्म इंडस्ट्री में किस प्रकार आए, उन्हें क्या स्ट्रगल करने पङे इस प्रकार
जवाब देंहटाएंहां ज़रूर पर तब पोस्ट बहुत लंबी हो जाती। हमें इसमें निजी जिंदगी से नहीं उनके गायक और कलाकार के रूप को ही बताना था, जिसकी वजह से उन्हें सब प्यार करते हैं।
हटाएंकिसी की निजता का उल्लंघन करना हमारा उद्देश्य नहीं होना चाहिए।🙏🙏
और भी ऐड हो सकता था जैसे किशोर कुमार की निजी पारिवारिक ,उनकी पत्नी के बारे में,उनके बचपन , उनके पिता के बारे में ,वह फिल्म इंडस्ट्री में किस प्रकार आए, उन्हें क्या स्ट्रगल करने पङे इस प्रकार
जवाब देंहटाएंUnke jaisa koi or kalakar na hi jnma h or shayd hi janmega.....apni hr Pratibha se vo bs logo ko entertain krte gye, unke chehre pr 1 muskaan late rhe.....
जवाब देंहटाएंसही कहा।
हटाएंAapki post ne Kishor Kumar ji ki yaad dila di.
जवाब देंहटाएंDhanyawad
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