विजय-विश्व तिरंगा प्यारा, झण्डा ऊँचा रहे हमारा।
दोस्तों!
हमारे देश के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के बारे में तो आप सभी जानते ही हैं,
लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस झण्डे को डिजाइन, रंग,
रूप, आकार-प्रकार किसने दिया होगा ? चलिए आज मैं आपको बताती
हूँ कि हमारे देश के झण्डे को डिजाइन करने वाले थे- पिंगली वैंकैया। ये एक
सच्चे देशभक्त और कृषि वैज्ञानिक भी थे। इनका जन्म 2 अगस्त 1876 ई. में
भटलापेनुमारू नामक स्थान, मछलीपट्टनम (वर्तमान में आन्ध्रप्रदेश) में
ब्राह्मण कुल नियोगी परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम पाण्डुरंग और माता का
नाम काल्पवती था। पिंगली वैंकैया कई भाषाओं और विषयों के जानकार थे। भू-विज्ञान और
कृषि क्षेत्र में इनकी विशेष रुचि थी। ये हीरों
की खदान के विशेषज्ञ और ब्रिटिश भारतीय सेना के योद्धा भी रहे थे। दक्षिण
अफ्रीका में जब इन्होने एंग्लो-बोअर युद्ध में भाग लिया था,
तभी वहीं इनकी भेंट गांधीजी से हुई। गांधीजी से मिलने के बाद ये उनके विचारों से
बहुत प्रभावित हुए।
गांधीजी
ने ही उन्हे राष्ट्रीय ध्वज का प्रारूप तैयार करने के लिए कहा था। 1916-1921 तक
इन्होने झंडों के अध्ययन में स्वयं को पूरी तरह समर्पित कर दिया। सर्वप्रथम झण्डे
के प्रारूप में 2 ही रंग थे- केसरिया और हरा। ये दोनों रंग यहाँ के हिन्दू और
मुस्लिम जातियों के परिचायक थे। बाद में गांधीजी ने इसके बीच में शांति के प्रतीक
सफ़ेद रंग का सुझाव दिया जिसे मान लिया गया और सफ़ेद रंग पर चरखे को भी चिन्हित किया
गया। इस तरह 1931 में कांग्रेस ने कराची के अखिल भारतीय सम्मेलन में
केसरिया, सफ़ेद और हरे रंग से बने तिरंगे को सबकी सहमति से स्वीकार किया
गया। चरखे के स्थान पर जालंधर के हंसराज ने अशोक चक्र का सुझाव दिया,
जिसे मान लिया गया।
आज जो झण्डा देश में
फहराया जाता है, उसे 22 जुलाई 1947 को अपनाया गया था,
जोमूलरूप से 1931 के झण्डे का ही अंशतः परिवर्तित प्रारूप है। 4 जुलाई 1963 को
पिंगली वैंकैया का स्वर्गवास हो गया। 2009 में भारत सरकार ने इनके सम्मान में एक डाक
टिकट भी जारी किया। आज जो तिरंगा है, उसका अर्थ हम इस प्रकार समझ सकते हैं- सबसे ऊपर
केसरिया रंग साहस और बलिदान को दर्शाता है, बीच में सफ़ेद रंग सत्य और शांति का प्रतीक है,
सबसे नीचे हरा रंग हरियाली और खुशहाली को बताता है और सफ़ेद रंग के बीच का नीला
चक्र जो सारनाथ के अशोक स्तम्भ से लिया गया है, प्रगति और विकास का
प्रतिनिधित्व करते हुए ‘विधि के पहिए’ के रूप में जाना जाता है।
भारतीय ध्वज के विषय में
कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना होता है, जो इस प्रकार हैं- भारतीय ध्वज संहिता के मानकों
के अनुसार हमारे झण्डे का अनुपात 2:3 होना चाहिए। जिसमें लंबाई का भाग चौड़ाई का
1.5 गुना होना चाहिए। ध्वज के तीनों रंगों की पट्टियाँ बराबर चौड़ाई और लंबाई में
होनी चाहिए। झण्डा विशेष खड़ी के कपड़े का ही बना होता है। पुराना या फटने पर इसका
उचित रूप से निस्तारण किया जाना चाहिए। इसका अपमान एकपराध की श्रेणी में आता है।
इसलिए अपने झण्डे का सम्मान करें और दूसरों को भी इसके लिए जागरूक करें।


Vande mataram
जवाब देंहटाएंवन्दे मातरम् 🙏🇮🇳
हटाएंअच्छी एवं देश प्रेम भरी जानकारी
जवाब देंहटाएंधन्यवाद
हटाएंTirange ke bare me to sab jante h, par aapki post ne uske janak ke bare me mahatvpurn jankari di.
जवाब देंहटाएंDhanyawad
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