आज
श्रावण पूर्णिमा है, रक्षा बंधन का त्योहार भी है। इसके साथ-साथ
आज ‘संस्कृत दिवस और ऋषि पर्व’ भी है। आज ही के दिन ऋषिकुलों और गुरुकुलों में वेदाध्ययन कराने
से पहले यज्ञोपवीत (जनेऊ) धारण कराया जाता है। इसे उपनयन संस्कार भी कहते हैं।
सभी यज्ञोपवीत धारी आज के दिन पुराना यज्ञोपवीत बदलकर नया यज्ञोपवीत भी धारण करते हैं।
ब्राह्मण और पंडित जी आज अपने यजमानों को रक्षासूत्र भी बाँधते हैं। चूंकि ऋषि-मुनि
ही संस्कृत साहित्य के आदि स्रोत स्वरूप माने जाते हैं,
इसलिए इसे ऋषि-पर्व या ऋषि-पूर्णिमा भी कहा जाता है।
आज
के दिन राज्यों तथा जिलों में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं,
जैसे- संस्कृत कवि सम्मेलन, श्लोकोच्चारण प्रतियोगिता,
वाद-विवाद प्रतियोगिता, भाषण प्रतियोगिता, निबंध प्रतियोगिता,
लेखक गोष्ठी आदि। संस्कृत दिवस 1969 ई. से भारत सरकार के आदेश से प्रारम्भ किया
गया था। तभी से सम्पूर्ण देश में श्रावणी पूर्णिमा
को संस्कृत दिवस मनाया जाता है। सभी विद्यालयों और महाविद्यालयों में भी छात्रों के
द्वारा कई संस्कृत के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। संस्कृत दिवस के रूप में श्रावणी
पूर्णिमा को इसलिए चुना गया क्योंकि प्राचीन काल में भारतवर्ष इसी दिन से नया सत्र
प्रारम्भ होकर छात्रों का विद्याध्यायन होता था। उस समय पौष माह की पूर्णिमा से श्रावण
मास की पूर्णिमा तक विद्याध्यायन बंद करवा दिया जाता था,
जो आज अर्थात् श्रावणी पूर्णिमा से ही पुनः प्रारम्भ होता था।
संस्कृत
दिवस भारत में ही नहीं विदेशों में भी मनाया जाता है। संस्कृत शब्द ‘संस्कार’ से बना है। संस्कृत ऐसी भाषा है जो संस्कार सिखाती
है। आज जब भारत में संस्कृत को लोग भूल रहे हैं, तब विदेशों में इसकी महत्ता
को समझते हुए अपनाया जा रहा है। यह विडम्बना ही है कि विश्व कि सभी भाषाओं कि जननी
को, अपने जन्म स्थान पर ही अपना खोया सम्मान पुनः प्राप्त करने के लिए
एक दिवस का सहारा लेना पड़ रहा है। आज हमें इसके प्रचार-प्रसार की आवश्यकता है,
और इसकी आवश्यकता क्यों है, यह जानने के लिए कुछ तथ्यों को जान लेना अत्यावश्यक
है। ये तथ्य हैं-
1.
संस्कृत
भाषा का जन्म भारतवर्ष में हुआ और यह विश्व की सबसे पहले बोली, पढ़ी, लिखी और समझी जाने वाली सम्पूर्ण भाषा है।
2.
संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है, क्योंकि परोक्ष व अपरोक्ष रूप से विश्व की 98% भाषाओं पर संस्कृत
का ही प्रभाव है।
3.
संस्कृत
में प्रयायवाची शब्द किसी भी भाषा से अधिक होते हैं, इनकी संख्या 100 तक या इससे अधिक भी होती है।
4.
अनेक शोधों
में भी प्रमाणित हो चुका है कि संस्कृत पढ़ने से स्मरण शक्ति बढ़ती है।
5.
नासा के
वैज्ञानिकों द्वारा शोध के बाद बताया गया कि संस्कृत भाषा का प्रयोग करके कंप्यूटर
प्रोग्रामिंग को सुगम बनाया जा सकता है, और इसके
प्रयोग से कंप्यूटर प्रोग्रामिंग में किसी भी प्रकार कि त्रुटि असंभव है।
6.
अमेरिका
के एक विश्व विद्यालय ने माना है कि संस्कृत भाषा में बात करने, पढ़ने से मानव शरीर के सभी तंत्र सक्रिय रहते है, जिससे मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल, रक्तचाप
आदि रोगों में सुधार होता है।
7.
संस्कृत
भाषा कि व्याकरण और साहित्य वृहद, पूर्ण, प्रभावशाली
और त्रुटिविहीन है। यह पूर्णतः वैज्ञानिक भाषा है।
8.
संस्कृत
का शब्द भंडार विश्व कि किसी भी भाषा से विशाल है। इसमें लगभग 102 अरब, 78 करोड़, 50 लाख से भी अधिक शब्द हैं, जो किसी भी भाषा के शब्दकोश से अधिक हैं।
9.
नेपाल में
लगभग 1700 लोगों कि मातृभाषा संस्कृत है।
10. उत्तराखंड की आधिकारिक भाषा भी संस्कृत है।
11. जर्मनी में लगभग 14 विश्व विद्यालयों में संस्कृत भाषा
सिखायी जाती है।
12. नासा के वैज्ञानिकों ने बताया कि वे एक अजीब समस्या
का सामना कर रहे थे, जब वे अन्तरिक्ष में गए यात्रियों को कोई संदेश भेजते
थे तो उनके वाक्य उलट-पुलट जाते थे, जिससे उनका अर्थ बदल जाता था और समझना मुश्किल हो जाता
था। इसके उपाय के लिए उन्होने कई भाषाओं में संदेश भेज कर देखा परंतु समस्या ज्यों
की त्यों थी। अंत में संस्कृत भाषा में संदेश भेजा, जिसे अन्तरिक्ष यात्रियों ने आसानी से पढ़ लिया, क्योंकि केवल संस्कृत ही ऐसी भाषा है जिसका वाक्य उलटा भी हो जाए
तब भी इसका अर्थ नहीं बदलता है।
13. जर्मनी स्टेट यूनिवर्सिटी के शोध में पाया गया कि वर्तमान
के वार्षिक कैलेंडरों में हिन्दू पंचांग सर्वाधिक प्रभावशाली है, क्योंकि इसमें नया साल सौर प्रणाली और भू वैज्ञानिक परिवर्तन के
अनुरूप प्रारम्भ होता है।
14. अब तो अमेरिका भी अपने सुपर कंप्यूटर कि अगली पीढ़ी को
संस्कृत प्रोग्रामिंग के जरिए बना रहा है, जिससे
सुपर कंप्यूटर कि गणना शक्ति कई गुना बढ़ जाएगी।
15. कर्नाटक के एक ग्राम माथुर में आज भी सभी लोग संस्कृत में ही वार्तालाप करते हैं।
तो समझ में आया दोस्तों! संस्कृत में कुछ तो बात है,
अन्यथा यूँ ही इसे देववाणी, भाषाओं कि जननी, सुरभारती आदि नामों
से नहीं पुकारा जाता।
जयतु संस्कृतम्! वदतु संस्कृतम्!! जयतु भारतम्!!!
सीमा शर्मा
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| देवभाषा-संस्कृत भाषा |


जयतु संस्कृतम्
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इदं अतीव सुन्दरम् लेखम्
धन्यवादज्ञापन करोमि।🙏🙏
हटाएंजयतु संस्कृतम्
जवाब देंहटाएंवदतु संस्कृतम्
अत्यन्त ज्ञानवर्धक लेख
धन्यवादम् 🙏
हटाएंBahut achchhi post. Nayi shiksha niti me bhi sanskrit ko uchit sthan milne ki ummeed h
जवाब देंहटाएंDhanyawad
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