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रविवार, 16 अगस्त 2020

सदैव अटल

     अपने नाम की तरह सदैव अटल रहने वाले स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई जी की आज दूसरी पुण्यतिथि है। आज ही के दिन वर्ष 2018 में यह पुण्यात्मा पुरुष परमात्मा मे विलीन हो गए। अटल जी भारत के 10वें प्रधानमंत्री बने थे। पहली बार 16 मई – 1 जून 1996 तक और दुबारा 19 मार्च 1998 से 22 मई 2004 तक वे देश के प्रधानमंत्री पद पर सुशोभित रहे थे। वे एक मजबूत और श्रेष्ठ राजनेता होने के साथ-साथ हिन्दी कवि, पत्रकार और प्रखर वक्ता भी थे। वे भारतीय जनसंघ पार्टी के संस्थापकों में एक थे और 1968-1873 तक इसके अध्यक्ष पद पर भी रहे थे। इन्होने काफी समय तक राष्ट्रीय भावना से परिपूर्ण अनेक पत्र-पत्रिकाओं का भी सम्पादन किया था। ये पत्र-पत्रिकाएँ हैं- राष्ट्रधर्म, पांचजन्य और वीर-अर्जुन आदि।

       अटल जी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शिंदे की छावनी में हुआ था। इनके पिता का नाम पंडित कृष्ण बिहारी वाजपेयी तथा माता का नाम श्रीमती कृष्णा वाजपेयी था। वैसे तो पंडित कृष्ण बिहारी वाजपेयी जी उत्तर प्रदेश के आगरा जनपद के बटेश्वर ग्राम के मूल निवासी थे, परंतु अटल जी के जन्म के समय ये ग्वालियर रियासत में अध्यापक के रूप में कार्यरत थे, एवं सपत्नीक यहीं रहते थे। पंडित कृष्ण बिहारी जी अध्यापन के साथ-साथ हिन्दी एवं ब्रज भाषा के सिद्ध-हस्त कवि भी थे। अटल जी में काव्य के गुण अपने पिता से ही वंशानुगत रूप में आए थे। इन्होने ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज (वर्तमान लक्ष्मीबाई कॉलेज) से बी. ए. की शिक्षा ली। कानपुर के डी. ए. वी. कॉलेज से प्रथम श्रेणी से राजनीति शास्त्र में एम.ए. किया। इसके बाद कानपुर में ही एल.एल.बी. की पढ़ाई को बीच में ही छोड़कर संघ के कार्यों में जुट गए। यहीं पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदायल उपाध्याय की छत्रछाया में राजनीति का पाठ पढ़ा।

       1957-77 तक 20 वर्षों तक लगातार वे जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे। फिर जनता पार्टी की स्थापना के बाद 1977-1979 तक मोरारजी देसाई की सरकार में विदेश मंत्री रहते हुए भारत की छवि को विदेशों में सुदृढ़ करने में योगदान दिया। 1980 में जनता पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी की स्थापना में मदद की और 6 अप्रैल 1980 में बनी भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष भी बने। 2 बार राज्यसभा के सदस्य भी रहे। 1996 में पहली बार प्रधानमंत्री बने और 19 अप्रैल 1998-2004 तक पुनः प्रधानमंत्री रहे। प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए अटल जी ने देश के लिए अनेक बड़े कार्य किए। जैसे-

1.   11 मई और 13 मई 1998 को पोखरण में 5 भूमिगत परमाणु विस्फोट करके भारत को परमाणु शक्ति सम्पन्न देश बनाया।

2.   19 फरवरी 1999 को सदा-ए-सरहद नाम से दिल्ली-लाहौर बस सेवा शुरू करके पाकिस्तान से सम्बन्धों में सुधार की पहल की।

3.   अटल जी पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारणा चाहते थे, परंतु पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज़ नहीं आया। जब उसने परवेज़ मुशर्रफ की शह पर पाकिस्तानी सेना व उग्रवादियों के साथ कारगिल में घुसपैठ कर अनेक पहाड़ी चोटियों पर कब्जा कर लिया, तब अटल जी ने सेना प्रमुखों को आदेश दे, ठोस सैन्य कार्यवाही करके भारतीय क्षेत्र को मुक्त करवाया। इसमें हमारे कई वीर सैनिक भी शहीद हो गए।

4.   भारत के चारों कोनों को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना के अंतर्गत दिल्ली-कलकत्ता-चेन्नई-मुंबई को राजमार्गों से जोड़ा गया। स्वतंत्र भारत में अटल जी के कार्यकाल में ही सबसे ज्यादा सड़क मार्गों का निर्माण किया गया था।

       इसके अलावा भी इन्होने अनेक देशहित के कार्य किए। 16 अगस्त 2018 को 93 वर्ष की आयु में इनका स्वर्गवास हो गया। इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं-

1.   राग-राग हिन्दू मेरा परिचय

2.   मृत्यु या हत्या

3.   अमर बलिदान

4.   कैदी कविराय की कुंडलियाँ

5.   संसद में तीन दशक

6.   अमर आग है

7.   कुछ लेख: कुछ भाषण

8.   सेक्युलरवाद

9.   राजनीति की रपटीली राहें

10. बिन्दु-बिन्दु विचार

11. मेरी इक्यावन कविताएं

       अपने कार्यों के कारण इनको 1992 में पद्म विभूषण और 2015 में भारत रत्न जैसे पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया। अटल जी पहले विदेश मंत्री थे जिन्होने संयुक्त राष्ट्र संघ में हिन्दी में भाषण देकर भारत को गौरवान्वित किया था। इनकी दिल्ली स्थित समाधि का नाम भी सदैव अटल रखा गया है, जो इनके व्यक्तित्व को देखते हुए उपयुक्त लगता है।

   

सदैव अटल 

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