आज सब रंगे हैं आजादी के रंग में,
परंतु
इस बार जश्न है कुछ अलग ढंग में।
सबने
घर बैठे या ऑनलाइन ही पर्व मनाया,
फिर
भी देशराग है ढोलक और मृदंग में।
जी हाँ दोस्तों! आज की स्वतन्त्रता दिवस की सुबह पिछले 73 वर्षों
की सभी सुबहों से भिन्न है। आज लोगों के दिलों में देश के लिए जज़्बा तो वही है,
जोश भी वही है, परंतु समय थोड़ा अनुकूल नहीं है। हाँ दोस्तों! अभी
कोरोना महामारी का दौर चल रहा है, इसलिए इस बार हम सभी एक जगह इकट्ठा होकर
स्वतन्त्रता दिवस नहीं मना पा रहे हैं, परंतु कोई बात नहीं। इस बार हम घर पर रहकर ऑनलाइन
ही इसे मना रहे हैं। निराश न हों दोस्तों! समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता है। यह समय
भी निकल जाएगा। उम्मीदों का दामन थामे रखें, दिल में आशाओं के दीप जलाए रखें,
कोरोना रूपी अंधेरा अवश्य भाग जाएगा। हम सभी पुनः एक साथ होंगे,
मिलेंगे, बातें करेंगे, काम करेंगे, सारे पर्व और त्योहार मनाएंगे और पहले की तरह ही
सब कुछ सामान्य हो जाएगा।
दोस्तों! अभी कोरोना काल में घर के अंदर रहते हुए सभी ने आजादी
की कीमत को ज्यादा अच्छे से समझा है, इसके महत्त्व को माना है। लगभग 5 महीने से घरों
में रहते हुए सभी कार्यों को अंजाम देते हुए सभी को लॉकडाउन से पहले के हंसी-खुशी
भरे दिनों की बहुत याद आ रही होगी।
इन दिनों हम लोग अपने घरों में रहते
हुए भी कैदी के समान महसूस करते हैं, तो 15 अगस्त 1947 से पहले के गुलामी के दौर को महसूस
करने की कोशिश कीजिए। कल्पना से ही दिल दहल जाता है कि कोई विदेशी आपको अपने ही देश
में गुलाम बना देता है, तो कैसा नारकीय जीवन जीने को मजबूर होना पड़ता है!
आज के इस स्वतन्त्रता दिवस के पावन अवसर पर मैं देशवासियों से अपील
करती हूँ कि हमें जो ये आजादी मिली है, इसके मूल्यों को समझें,
इसका सम्मान करें। अपने देश के विकास में अपना यथोचित योगदान अवश्य करें। आज हम अंग्रेजों
से तो आजाद हो गए हैं, लेकिन अभी भी हमारे देश में अनेक शत्रु हैं,
जिनसे हमें मुक्ति की आवश्यकता है। ये शत्रु हैं- आतंकवाद,
सांप्रदायिकता, गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, भ्रष्टाचार आदि। इन सबसे मुक्ति के साथ-साथ हमें सभी
देशवासियों के दिलों में देशभक्ति की भावना पैदा करना,
महिलाओं को सम्मान और सुरक्षा देना, माता-पिता एवं गुरुजनों का सम्मान करना,
स्वावलंबी बनाना आदि संस्कार और नैतिक शिक्षा भी अपने बच्चों को अवश्य देनी चाहिए।
इन शिक्षाओं और संस्कारों से ही हमारा देश वास्तव में स्वतंत्र भारत कहलाएगा। जब नई
पीढ़ी इन गुणों से युक्त होगी तो भारत को आगे बढ़ने और विश्वगुरु बनने से कोई नहीं रोक
पाएगा।
इसी के साथ मैं दो पंक्तियाँ और जोड़ना चाहूंगी-
नौनिहालों में हो देशभक्ति, मात-पिता और गुरु सम्मान।
विश्व विजयी तिरंगा होगा, तभी बनेगा मेरा देश महान।
जय हिन्द !
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भारत की आन-बान-शान


🙏🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳jai hind
जवाब देंहटाएंJai hind🙏🇮🇳
जवाब देंहटाएंदेशभक्ति के जज्बे से भरा लेख।
जवाब देंहटाएंDhanyawad, mera bharat mahan🇮🇳
हटाएंविश्वव्यापी महामारी एवं आर्थिक संकट के दौर में स्वतंत्रता कि पहचान कराता ऐसा लेख जो स्वतंत्रता के वास्तविक मूल्यों की कसौटी कराने के लिए प्राचीन गुलामी का समय एवं वर्तमान कोरोना के कारण घर में रहने से तुलनात्मक अध्ययन करते हुए अति सुंदर आलेख।
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