“देश को भ्रष्टाचार मुक्त और
खूबसूरत बनाना हो तो तीन लोग अहम भूमिका निभाएंगे- माता,
पिता और शिक्षक।“
जी हाँ दोस्तों! हमारे देश
के ‘मिसाइल मैन’ कहे जाने वाले पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर अब्दुल कलाम
जी का यही कहना था। आज चारों तरफ फैले भ्रष्टाचार को देखें तो कलाम साहब की बात शत-प्रतिशत
सत्य प्रतीत होती है। कोई भी नागरिक सर्वप्रथम बच्चा ही होता है,
और उसका सबसे पहला संबंध अपने माता-पिता से तत्पश्चात शिक्षक से होता है। यहाँ कलाम
साहब के कहने का आशय है कि यदि बालक को जन्म से, घर से ही माता-पिता और उसके
बाद विद्यालय मेन शिक्षक द्वारा सत्य-पथ पर चलने का मार्ग दिखाया जाए तो देश भ्रष्टाचार
मुक्त और सुंदर ही बन जाएगा।
आज अब्दुल कलाम जी कि पाँचवी
पुण्यतिथी पर इनको स्मरण करते हुए इनके जीवन के बारे में एवं इनके अतुलनीय भारतीय योगदान
के बारे में चर्चा करते हैं-
कलाम साहब का जन्म 15 अक्तूबर
1931 को तमिलनाडु के रमानाथपुरम जिले के रामेश्वरम में मध्यम वर्गीय मुस्लिम परिवार
में हुआ था। इंका पूरा नाम अबुल पाकिर जैनुल अब्दिन अब्दुल कलाम मसऊदी था। ये संयुक्त
परिवार में रहते थे तथा 10 बहन-भाई थे। इनके पिता कम पढे-लिखे तथा निर्धन ही थे। लेकिन
वे बहुत मेहनती और ईमानदार थे। इन पर अपने पिता का बहुत प्रभाव पड़ा था। उनके दिये संस्कारों
ने ही उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। बचपन में इनके एक शिक्षक की दी
गई सीख का भी इन पर गहरा असर रहा। उन्होने कहा था कि “जीवन में सफलता तथा अनुकूल परिणाम
प्राप्त करने के लिए तीव्र इच्छा, आस्था, अपेक्षा इन तीन शक्तियों को भलीभाँति समझ लेना और उन
पर प्रभुत्व स्थापित करना चाहिए।
बचपन में एकबार जब वे पाँचवी
कक्षा में थे, तब उनके अध्यापक उन्हें पक्षियों के उड़ने का तरीका
समझने के लिए समुद्र के किनारे पर ले गए थे, तभी उन्होने निश्चय कर लिया था कि उन्हें अन्तरिक्ष-वैज्ञानिक
ही बनना है। 1950 में इन्होने मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी से अन्तरिक्ष विज्ञान
में स्नातक की डिग्री ली। 1962 में भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन में आने के बाद
इन्होने सफलता पूर्वक कई उपग्रह प्रक्षेपण परियोजनाओं में अहम भूमिका निभाई। पहले स्वदेशी
उपग्रह प्रक्षेपण यान एस एल वी 3 के निर्माण में परियोजना निदेशक बने,
जिससे जुलाई 1982 में रोहिणी उपग्रह का अन्तरिक्ष में सफलता पूर्वक प्रक्षेपण किया
गया। इसरो लॉन्च व्हीकल प्रोग्राम को पंख लगाने का श्रेय भी इनको ही जाता है। इन्होने
‘अग्नि’ एवं ‘पृथ्वी’ जैसे प्रक्षेपात्रों को स्वदेशी तकनीक से बनाया।
कलाम साहब जुलाई 1992 से दिसंबर
1999 तक रक्षामंत्री के सलाहकार तथा सुरक्षा शोध और विकास विभाग के सचिव रहे थे। इन्हीं
के निर्देशन में भारत ने 1998 में पोखरण में दूसरी बार परमाणु परीक्षण करके परमाणु
हथियार के निर्माण की क्षमता प्राप्त की। ये भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार
भी रहे। 18 जुलाई 2002 को कलाम साहब 90 प्रतिशत बहुमत द्वारा राष्ट्रपति चुने गए। इंका
कार्यकाल 25 जुलाई 2007 को समाप्त हुआ था। राष्ट्रपति कार्यकाल समाप्त होने के बाद
भी वो अनेक शिक्षण संस्थानों, विश्व-विद्यालयों में विजिटिंग प्रोफेसर के तौर पर
पढ़ाते रहे थे। 27 जुलाई 2015 को वे भारतीय प्रबंधन संस्थान शिलोंग में ‘रहने
योग्य ग्रह’ पर एक व्याख्यान दे रहे थे,
तभी उन्हें हार्ट-अटैक आया और 2 घंटे बाद इनकी मृत्यु की पुष्टि हो गई।
व्यक्तिगत जीवन में कलाम साहब
बहुत ही अनुशासन प्रिय व्यक्ति थे। इन्होने अपनी पुस्तक ‘विंग्स
ऑफ फायर’ से कई युवाओं को मार्गदर्शन कराया। इनकी एक और पुस्तक है जो इनके
आत्मिक विचारों को उद्धृत करती है –‘गाइडिंग सोल्स-डायलोग्स ऑफ द पर्पज ऑफ लाइफ।’
इन्होने तमिल भाषा में कविताएं भी लिखीं। ये भारत को अन्तरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र
में विश्व में चोटी पर देखना चाहते थे। ये विचार इन्होने अपनी पुस्तक ‘इंडिया
2020 – ए विजन फॉर द न्यू मिलेनियम’ में लिखे हैं। इसके लिए इन्होने कार्य-योजना भी बना
ली थी। ‘माई जर्नी’ तथा ‘इग्नाइटेड माइण्ड्स – अनलिशिंग द पावर विदिन इंडिया’
भी इनकी बहुत प्रसिद्ध पुस्तकें हैं।
कलाम साहब नित्य कर्नाटक भक्ति
संगीत सुनते थे, और हिन्दू संस्कृति में उनका विश्वास था। वे कुरान
और भगवद-गीता दोनों का ही अध्ययन करते थे। वे जीवन भर शाकाहारी रहे थे। 2011 में उन
पर ‘आई एम कलाम’ एक हिन्दी फिल्म भी बनी,
जिसमें एक राजस्थानी बच्चा ‘छोटू’ उनके सम्मान में अपना नाम ‘कलाम’
रख लेता है। भारत सरकार द्वारा कलाम साहब को इनके महान कार्यों और विज्ञान के क्षेत्र
में अमूल्य योगदान के लिए अनेक पुरस्कार भी प्रदान किए गए-
1.
पद्म भूषण
- 1981
2.
पद्म विभूषण
– 1990
3.
भारत रत्न
– 1997
कलाम साहब की बातें तो इतनी
है कि जीवन में अपनाते जाओ तो धरती स्वर्ग बन जाएगी। उनके ज्ञान के सागर में से मैं
दो बूंदों के समान उनकी दो बातें आज कि नयी पीढ़ी के लिए दोहराना चाहूंगी। कलाम साहब
कहते थे-
“सपने वो नहीं,
जो आप सोते वक्त देखते हैं, सपने वो होते हैं, जो आपको सोने नहीं देते हैं।“
“जिस दिन हमारे सिग्नेचर ऑटोग्राफ
में बदल जाएँ तो मान लीजिए कि आप कामयाब हो गए हैं।“
कलाम साहब के विचार आज भी युवा
पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक हैं।


Waah masii
जवाब देंहटाएंबहुत ही शानदार लेख से एक सच्चे
जवाब देंहटाएंमुसलमान एक सच्चे भारतीय एक सच्चे शिक्षक एक सच्चे लेखक एक सच्चे मार्गदर्शक एक सच्चे इंसान सदी के महानतम नायक को हृदय की अनंत गहराइयों से वंदन
धन्यवाद
हटाएंभारत के मिसाईल मैन को नमन। उत्तम लेख
जवाब देंहटाएंधन्यवाद
हटाएंMissile Man, People's President ke naam se prasidh Dr. A.P.J. Abdul Kalam Ji ko shat shat naman......sabhi k liye 1 prernastrotra.....apni antim sans tk unhone yuvaon ko gyaan pradan kiya..... sabhi k liye role model 🤩🙏
जवाब देंहटाएंEkdam sahi kaha aapne 🙏
हटाएंSalute to him n this blog is very inspiring 👌
जवाब देंहटाएंबहुत ही शानदार लेख masi G
जवाब देंहटाएंधन्यवाद
हटाएंGreat man ke baare me great article
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