बारिश, वर्षा, बरखा, बरसात, मेह आदि नाम बारिश के ही
पर्यायवाची हैं। वर्षा ऋतु अत्यंत ही सुहावनी ऋतु होती है। यह गर्मी से तप्त धरती
को शीतल फुहारों से ठंडक प्रदान करती है। किसानों के चेहरों पर रौनक आ जाती है।
मोर-पपीहे नाचने-गाने लगते हैं। मेंढक-दादुर टर्र-टर्र की ध्वनि के साथ टर्राने
लगते हैं। बच्चों की टोलियाँ कागज़ की नावें बनाकर तैराने लगते हैं। ताल-तलैया सब
भर जाते हैं। पेड़-पौधे सब सजे-संवरे से लगने लगते हैं। आकाश में सतरंगी इंद्रधनुष
अपनी छटा से सबका मन मोह लेता है।
चारों तरफ शस्य-श्यामला वसुंधरा मुस्कराती दिखाई पड़ती है। लगता है जैसे प्रकृति रुपी दुल्हन हरे रंग के लिबास में अनेक रंगों के सितारे जड़े घूँघट ओढ़े मतवाली मस्ती में ही मगन है। सभी लोग बेसब्री से बारिश का इन्तजार करते हैं। बारिश में सावन की झड़ी की तो बात ही निराली है। हर कोई शिव भोले की तरह मदमस्त ही दिखाई पड़ता है। हिंदी फिल्म जगत भी इससे अछूता नहीं रहा है। बारिश और सावन पर बॉलीवुड में अनेक गाने फिल्माए गए हैं, जो सदाबहार बन गए हैं। कुछ गानों की सूची यहाँ है, इसके द्वारा आप सब भी सावन की बारिश को संगीत के साथ महसूस कीजिए और इस मतवाले मौसम का पूर्णरूपेण आनंद उठाइए ;
1. सावन का महीना
पवन करे शोर.......... (मिलन)
2. आया सावन झूम
के....... (शीर्षक गीत)
3. प्यार हुआ इकरार हुआ.......... (श्री 420)
4. एक लड़की भीगी-भागी सी.......... (चलती का नाम गाड़ी)
5. भीगी-भीगी रातों में.......... (अजनबी)
6. रिमझिम गिरे सावन.......... (मंजिल)
7. रिमझिम-रिमझिम.......... (1942 ए लव स्टोरी)
8. लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है.......... (चाँदनी)
9. घनन-घनन घिर-घिर आये बदरा.......... (लगान)
10. बरसो रे मेघा.......... (गुरु)
11. इधर चला मैं उधर चला.......... (कोई मिल गया)
12. मेरे ख़्वाबों में जो आए.......... (दिलवाले दुल्हनियां ले जाएँगे)
13. ताल से ताल मिला.......... (ताल)
14. जूबी-डूबी.......... (3 इडियट्स)
15. कोई लड़की है चक धूम धूम.......... (दिल तो पागल है)
ये लिस्ट इतनी लम्बी है की यहाँ पूरी देना संभव नहीं है। इसके अलावा भी राजस्थान व हरियाणा क्षेत्र में भी एक अत्यंत ही लोकप्रिय बारिश का लोकगीत है जो बहुत ज्यादा डीजे आदि पर बजता है। लोग सभी कार्यक्रमों में उस पर नृत्य का भी लुत्फ़ उठाते हैं। इस गीत में बारिश के देवता इन्द्र से बरसने की प्रार्थना कुछ इस प्रकार की जाती है ;
बरस-बरस म्हारा
इन्दर राजा, तू बरस्यां
म्हारो काज सरै........
सीमा शर्मा
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| RIMJHIM BARISH |


मद्विषयक लेख नहीं है तथापि जानकारी एवं अलग तरीका इसको रोचक बना रहा है तथा युवाओं को और पुराने संगीत प्रेमियों को समान रूप से अच्छा लगेगा ऐसी आशा है।
जवाब देंहटाएंसभी पाठकों की पसंद का ध्यान रखते हुए ही ये लेख लिखा गया है।
हटाएंबारिश के मज़े को और भी मजेदार बना देने वाला लेख👍🌧️
जवाब देंहटाएंDhanyawad
हटाएंAapke lekh aur sujhavit gaanon ne savan ki barish ka mja duguna kar diya.
जवाब देंहटाएंधन्यवाद
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