‘कृष’ फिल्म का ‘जादू’ तो सभी को याद ही होगा। वह न तो मनुष्य था और न ही जानवर। उस फिल्म में दिखाया गया था कि वह एक गोल और चमकीली उड़ने वाली किसी तश्तरीनुमा वस्तु से पृथ्वी पर आया था। ऐसा ही एक दृश्य हमने P. K. फिल्म में भी देखा जिसमें लगभग उसी तरह के यान से कोई प्राणी पृथ्वी पर आ जाता है। अंतर इतना ही था कि वह प्राणी देखने में मनुष्य जैसा लग रहा था।
ये तो हुई फिल्मों की बातें, जिनमें कल्पनाओं और कहानियों का सहारा लिया जाता है। परन्तु सम्पूर्ण विश्व से समय -समय पर ऐसी ख़बरें आती रहती हैं कि इस तरह की घटनाएँ पृथ्वी पर हो रही हैं। ऐसे तश्तरीनुमा गोल यान बहुत बार अलग-अलग देशों में अलग-अलग समय पर देखे जाते रहे हैं।पृथ्वीवासियों द्वारा इन्हें उड़नतश्तरी और इन अजीब प्राणियों को एलियन नाम दिया गया। आज विश्व उड़नतश्तरी दिवस है। यह दिवस 2 जुलाई 2001 से प्रतिवर्ष मनाया जाता है। यह आकाश में उड़नेवाली अज्ञात वस्तु दिखने में किसी डिस्क या तश्तरी जैसी दिखने के कारण ही इसे उड़नतश्तरी कहा जाने लगा। इन्हें देखने का दावा करने वाले बताते हैं कि इनमें बहुत तेज रोशनी होती है और ये बहुत सूक्ष्म से लेकर बहुत विशाल आकार की भी होती हैं।
1940 के दशक में ये बहुतायत से पृथ्वी पर देखी गई थी। तभी से उड़नतश्तरी नाम भी प्रचलन में आया। माना जाता है कि इन्हें धरती की आवश्यकता नहीं होती। इनका सम्बन्ध परग्रही अर्थात् किसी अन्य ग्रह की दुनिया से माना जाता है, क्योंकि इनके सञ्चालन में प्रयोग होने वाली अद्वितीय और अनूठी क्षमता पृथ्वीवासियों की किसी भी मशीन से मेल नहीं खाती है।
पिछले 50 - 60 वर्षों में मानव इतिहास में इनको देखने के प्रतिवेदन ज्यादा प्रकाश में आए हैं। अब तो इनका अध्ययन भी किया जाने लगा है। इनके अध्ययन को यूफोलॉजी कहा जाता है। इनका अध्ययन करने वाले लोग इस तरह की घटनाओं की खोज एवं शोध करते हैं । अध्ययन में सामने आया है कि कई बार लोग अंजाने में आपातकालीन झंडों, मौसमी गुब्बारों, उल्काओं व चमकदार बादलों को भी उड़नतश्तरी समझ लेते हैं।
इतिहास की कुछ घटनाएँ बताती है कि हमेशा ऐसा नहीं होता है। कभी-कभी इतने लोगों द्वारा इन्हें देखने का दावा किया गया है और पीछे छूटे निशानों को देखकर लगता है कि वास्तव में उड़नतश्तरी, दूसरे ग्रह के प्राणी, एलियन आदि होते हैं। रूस में 1989 में 3 - 4 बार अलग-अलग जगहों पर कई लोगों द्वारा बहुत देर तक उड़नतश्तरी देखे जाने का दावा किया गया।
सबसे ज्यादा रोमांचकारी किस्सा 17 सितम्बर 1989 का ही है। इस दिन रूस के वोरोनेज के एक पार्क में कुछ बच्चे खेल रहे थे। अचानक वहाँ लाल रंग का एक बहुत बड़ा अंडाकार यान उतरा। उसे देखने बहुत से लोग वहाँ इकट्ठे हो गए। कुछ देर बाद उसमें से दो अजीब से प्राणी (एलियन ) निकले। एक लगभग 12 - 14 फ़ीट लम्बा और तीन आँखों वाला था जबकि दूसरा रोबोट जैसा लग रहा था। बच्चे उन्हें देखकर चिल्लाने लगे। तब उनमें से एक ने बच्चे पर लाईट की बीम छोड़ी जिससे बच्चा लकवे जैसी हालत में पहुँच गया। बाद में उस जगह की रिसर्च की गई तो वहाँ की मिट्टी में रेडिएशन के निशान पाए गए। फॉस्फोरस की मात्रा भी अत्यधिक मिली। वैज्ञानिकों के अनुसार इस यू.एफ.ओ. (Unidentified Flying Object) का वज़न कई टन रहा था।
यू.एफ.ओ. डे 2 जुलाई को दुनियाभर में मनाया जाता है। इसे मनाने का मकसद है कि इस विषय पर सभी देशों के अब तक के अनुभवों पर बहस हो और सार्वजानिक तौर पर रिसर्च भी की जाए। जिससे वास्तविकता का पता भी लगाया जा सके। यह भी पता लगाया जा सके की यह सिर्फ वहम है या सचमुच में पृथ्वी पर कोई खतरा मंडरा रहा है।
सीमा शर्मा


Very interesting
जवाब देंहटाएंBahut badhiya jankari ke liye dhanyawad
जवाब देंहटाएंAapka sahyog yu hi banaye rakhiye
हटाएंAbhi tak filmo me hi dekha tha. Aapke post se aur bhi jaankari mili.
जवाब देंहटाएंधन्यवाद
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