जैसा कि आप सब जानते हैं कि सावन का महीना चल रहा है। सावन का महीना हो और भोले की एवं शिवरात्रि की बात न हो, ऐसा तो हो ही नहीं सकता। वैसे तो प्रत्येक महीने की कृष्ण चतुर्दशी को शिवरात्रि होती है और शिव को चाहने वाले शिव के भक्त उनकी पूजा करते हैं। परन्तु इनमें भी दो शिवरात्रि का अत्यंत महत्त्व है। इन दोनों शिवरात्रि पर शिवभक्तों का जोश और पूजा-अर्चना देखते ही बनती है। चारों तरफ शिवमय वातावरण ही होता है। बम-बम भोले, हर-हर महादेव, ॐ नमः शिवाय, जय शंकर की, जय भोलेनाथ आदि के जयकारे ही सुनाई पड़ते हैं। हर कोई भोले बाबा को अपनी पूजा-अर्चना से मनाना चाहता है। शिव मंदिरों में भक्तों की लम्बी-लम्बी कतारें लगी होती हैं, परन्तु किसी के भी चेहरे पर थकान या माथे पर शिकन तक नहीं होती है, वे सभी भक्त अपने शिव की पूजा का इंतज़ार नाचते-गाते ख़ुशी-ख़ुशी करते हैं।
इन दो महत्वपूर्ण शिवरात्रि में पहली है महाशिवरात्रि। यह फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को बहुत ही धूमधाम से पूरे देश में मनाई जाती है। माना जाता है कि इसी दिन सृष्टि का प्रारम्भ हुआ था। दूसरी शिवरात्रि है श्रावण कृष्ण चतुर्दशी को पड़ने वाली श्रावणी शिवरात्रि। इसका भी बहुत महत्त्व है क्योंकि एक तो यह सावन माह में आती है, जो पूरा माह ही शिवजी का है, और इसका महत्त्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि माना जाता है कि आज ही के दिन माता पार्वती ने कावड़ से जल लाकर शिवजी को चढ़ाया था। इसके फलस्वरूप शिवजी ने प्रसन्न होकर पार्वती जी के साथ विवाह की प्रार्थना को स्वीकार कर लिया था। तभी से शिवभक्त अनेक जगहों से कावड़ का जल आज ही के दिन शिवजी को अर्पित करके अपनी मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं। आज के दिन शिवजी का अभिषेक करने का भी बड़ा पुण्य मिलता है। भक्त आज के दिन शिवजी का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, रुद्राभिषेक, महाभिषेक आदि करके अपने मनोरथ पूर्ण करते हैं।
शिवजी के १२ ज्योतिर्लिंग भी पूजा-अर्चना के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। ये द्वादश ज्योतिर्लिंग कहलाते हैं। इन्हें 'स्वयं भू' अर्थात् 'स्वयं उत्पन्न' रूप में भी जाना जाता है। भोलेनाथ की अर्चना के लिए ये भारत के अलग-अलग बारह स्थानों पर स्थापित हैं। ये स्थान हैं-
१. सोमनाथ- गुजरात के काठियावाड़ में
२. श्री शैल मल्लिकार्जुन- मद्रास में कृष्णा नदी के किनारे पर्वत पर
३. महाकाल- उज्जैन के अवन्ति नगर में
४. ॐकारेश्वर- मध्यप्रदेश में नर्मदा तट पर
५. नागेश्वर- गुजरात में द्वारकाधाम के निकट
६. बैजनाथ- बिहार के बैद्यनाथ धाम में
७. भीमाशंकर- महाराष्ट्र की भीमा नदी के किनारे
८. त्र्यंबकेश्वर- महाराष्ट्र में नासिक से २५ किलोमीटर दूर
९. घुमेश्वर- महाराष्ट्र के औरंगाबाद में एलोरा गुफा के पास वेसल गाँव में
१०. केदारनाथ- उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में हिमालय पर
११. काशी विश्वनाथ- बनारस के काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित
१२. रामेश्वरम- मद्रास के त्रिचनापल्ली में समुद्र तट पर
इसके अलावा भारत से बाहर भी जो प्रसिद्ध शिव मंदिर हैं, वो ये हैं -
१. चंद्रधाम- चिटगांव (बांग्लादेश)
२. पशुपतिनाथ- काठमांडू (नेपाल)
देश और विदेश के इन शिव पूजास्थलों के अतिरिक्त एक और भी अत्यंत ही महत्वपूर्ण स्थान भारत में ही है- अमरनाथ गुफा। यह जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में स्थित है। यह एक बहुत लम्बी, चौड़ी और ऊंचाई पर स्थित गुफा है। इसकी विशेषता है कि यहाँ कुदरती रूप से प्रत्येक वर्ष बर्फ का शिवलिंग बनता है। इसीलिए इन्हे 'बर्फानी बाबा' भी कहते हैं। अमरनाथ को 'तीर्थों का तीर्थ' भी कहा जाता है, क्योंकि माना जाता है कि यही पर भगवान शिव ने माता पार्वती को 'अमरत्व का रहस्य' समझाया था।
ॐ नमः शिवाय
सीमा शर्मा
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| शिव-पार्वती |


शिवजी का कल्याणकारी प्रसंग
जवाब देंहटाएंधन्यवाद 🙏
जवाब देंहटाएंआध्यात्मिक पोस्ट
जवाब देंहटाएंधन्यवाद 🙏
हटाएंShivratri aur 12 jyotirlingon ke bare men achhi jankari di.
जवाब देंहटाएंधन्यवाद
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