बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1989 में 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य जनसंख्या से सम्बंधित समस्याओं पर दुनिया में चेतना जागृत करना था। 1989 से सारी दुनिया प्रतिवर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाती है। इसका उद्देश्य अभी भी जनसंख्या मुद्दों पर लोगों की जागरूकता बढ़ाना है - जैसे कि परिवार नियोजन, लिंग समानता, गरीबी, मातृ स्वास्थ्य और मानव अधिकारों का महत्त्व आदि।
आज विश्व की आबादी साढ़े सात अरब हो चुकी है। इसमें कोई दोराय नहीं कि बढ़ती आबादी पूरी दुनिया के लिए खतरा है, लेकिन यदि हम भारत की बात करें तो यह अत्यंत चिंतनीय है। वर्तमान में भारत विश्व का दूसरा सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश है। इसी तरह से जन्मदर बढ़ती रही तो अगले कुछ ही वर्षों में हमारा स्थान पहला भी हो सकता है। हमारे कुछ बड़े राज्यों की जनसंख्या तो इतनी अधिक है कि वह किसी एक देश की आबादी के बराबर हो जाती है। भारत में सबसे ज्यादा आबादी वाला देश उत्तर प्रदेश है। यहाँ की आबादी ब्राज़ील के बराबर है।
भारत की आबादी के हिसाब से यहाँ संसाधनों की कमी है। दुनिया की 18 प्रतिशत जनसंख्या भारत में रहती है। जबकि विश्व की केवल 2.4 प्रतिशत धरती, 4 प्रतिशत पेयजल और 2.4 प्रतिशत जंगल भारत में हैं। यह असंतुलित अनुपात ही चिंता का विषय है। यह चिंता तब और बढ़ जाती है जब उपलब्ध संसाधनों में कमी और जनसंख्या में वृद्धि दर्ज की जा रही हो।
इतनी बड़ी आबादी वाले देश में अनेक समस्याओं ने भी जन्म ले लिया है। जैसे- बेरोजगारी, गरीबी, खाद्य-संकट, शिक्षा की कमी, स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएँ, यातायात की समस्या आदि। वैसे तो प्राकृतिक साधन सभी जगह किसी न किसी रूप में उपलब्ध होते ही हैं, परन्तु उनकी भी एक सीमा होती है। अतः जिस तरह प्राकृतिक संसाधनों की एक सीमा है वैसे ही जनसंख्या वृद्धि की भी एक सीमा होनी चाहिए। भारत की आबादी अब 137 करोड़ हो चुकी है। इस पर जल्द ही नियंत्रण की आवश्यकता है। यदि समय रहते जनता जागरूक होकर नियंत्रण नहीं कर पाई तो विकट परिस्थितियाँ पैदा हो जाएँगी, जिसका परिणाम भी जनता को ही भुगतना पड़ेगा।
अंत में बस यही कहना चाहूँगी कि जनसंख्या वृद्धि पर सभी को जागरूक करें एवं स्वयं भी इसके नियंत्रण और रोकथाम में अपना यथोचित योगदान दें।
सीमा शर्मा
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| यदि छोटा होगा परिवार,तो समस्याओं का नहीं होगा अम्बार। |


एकदम सटीक बात कही है आपने....यदि इसी प्रकार आबादी बढ़ती रही तो भविष्य में भारत के लिए चुनौति और परेशानी का विषय बन सकता है। कोरोना संकट के दौरान भी यही देखने को मिला है।
जवाब देंहटाएंबिलकुल सही बात कही है।
हटाएंवर्तमानकालीन उत्तम विचार जिस पर मेरे भी दो पद मैं यहां प्रस्तुत कर रहा हूं।
जवाब देंहटाएंजन-धन को जो पीढ़ियों तक बचाना है।
जनसंख्या नियंत्रण मजबूती से निभाना है।
किसी के दो और किसी के चार।
कानून अवमानना भी अत्याचार।।
Right.
हटाएंयदि इंसानों की आबादी ज्यादा हुई तो बाकी सभी जीव जंतु ,पेड़ पौधे, नदी तालाब और प्राकृतिक संपदाएं लुप्तप्राय होजाएगी
इस समस्या से हर देश चिंतित है पर ना ही तो राष्ट्रीय स्तर पर ओर ना ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ही किसी कानून का अस्तित्व है
ये तो प्रकृति देवी ही है जो समय समय पर अपना पल्लू हलका करती रहती है
प्रकृति बहुत बलवान है।
हटाएंजनार्दन भाई, आपने भी बहुत सुंदर पंक्तियों में अपने विचार व्यक्त किए हैं।
हटाएंआने वाली विकट परिस्थिति से रूबरू कराती आज की पोस्ट जानदार । 👍👍👍💐
जवाब देंहटाएंधन्यवाद जी।🙏
हटाएंबढ़िया पोस्ट
जवाब देंहटाएंDhanywad Ji
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