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सोमवार, 8 जून 2020

कल, आज और कल

मनुष्य सर्वदा बीते कल अर्थात् भूतकाल में उलझा रहता है । भूतकाल की  विफलताओं पर रोता रहता है, अथवा आने वाले कल के बारे में सोचता रहता है । भविष्य के सपनों में खोया रहता है । परन्तु इन सब के बीच में  वह सर्वप्रमुख , सत्य-सनातन आज अर्थात् वर्तमान को भूल जाता है ।

                                यदि मनुष्य वर्तमान को ही संवार ले तो भूत और भविष्य दोनों ही उज्ज्वल हो जाएँगे, क्योंकि जो आज है वही कल भूत बन जाएगा और जो आज भविष्य है वही कल वर्तमान भी बन जाएगा।

                                यहाँ कविता की कुछ पंक्तियों के माध्यम से मैं यही बताने का प्रयास कर रही हूँ कि हमें बीते कल (भूतकाल) की विफलताओं से सबक लेते हुए आज (वर्तमान काल) में कार्य करते हुए अपने आने वाले कल (भविष्यत् काल) को संवारना चाहिए ।

कविता की पंक्तियाँ –

कल, आज और कल,

बीता जाए समय का पल ।

भूतकाल में क्यों तू उलझा,

वो तो कल की बात थी |

आज अभी को देख बावरे,

है सूर्योदय प्राची में नवल|1| बीता जाए........

तू केवल भावी स्वप्न में न खोना,

आज पर तेरा कल भी टिका है |

कर्म की सीढ़ी लगा कर बन्दे,

नवयुग की तू कर दे पहल|2| बीता जाए........

आज ही तेरा सत्य-सनातन,

कल को फिर क्यों रोता है?

आज को जो तू कर ले सार्थक,

निश्चय कल तू पायेगा मीठा फल|3| बीता जाए........

                                सीमा शर्मा

हिंदी कहानी कल आज और कल by Virender Veer Mehta



4 टिप्‍पणियां:

  1. बिलकुल सही बात है,मनुष्य को वर्तमान में जीना चाहिए ।बहुत सार्थक कथन।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. हां, आज मनुष्य आज को ही भूलता जा रहा है।
      टिप्पणी के लिए आपका आभार, कृपया अपना नाम भी उजागर करें।🙏

      हटाएं
  2. "जो आज है वही कल भूत बन जाएगा और जो आज भविष्य है वही कल वर्तमान भी बन जाएगा।जो आज है वही कल भूत बन जाएगा और जो आज भविष्य है वही कल वर्तमान भी बन जाएगा।

    💯☑️

    जवाब देंहटाएं

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