हम सबको किसी भी चीज का सर्वे या जानकारी लेनी हो तो आंकड़े (Data) इकट्ठे करते हैं। आंकड़ों के माध्यम से आगे की योजना बना सकते हैं। किसी भी चीज को स्वयं अच्छे से समझ सकते हैं और दूसरों को भी समझा सकते हैं। आंकड़ों की भाषा को सांख्यिकी (Statistics) कहते हैं।
दोस्तों! आज हम यहाँ बात कर रहे है आंकड़ों के जादूगर प्रोफ़ेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस की। इनका आज 29 जून को 127 वाँ जन्मदिन है। भारत में अनेक प्रसिद्ध वैज्ञानिक हुए हैं। उन्हीं में से एक महान वैज्ञानिक और सांख्यिकी संस्थान के संस्थापक प्रोफ़ेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस भी हुए हैं।
इनका जन्म 29 जून 1893 को हुआ था। ये पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के रहने वाले थे। कोलकाता से शिक्षा ग्रहण करने के बाद ये आगे की पढ़ाई के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ़ लन्दन गए थे। इनका सांख्यिकी ज्ञान वहाँ की प्रसिद्ध पत्रिका बायोमेट्रिका से हुआ। इसके लेखों को ये बड़े ध्यान से पढ़ते थे।
इनका भारतीय सांख्यिकी क्षेत्र में बहुत बड़ा योगदान रहा है। लन्दन से आने के बाद इन्होने 1931 में भारतीय सांख्यिकी संस्थान(Indian Statistical Institute) की स्थापना की। सांख्यिकी क्षेत्र के योगदान में इनका प्रथम प्रयास मानवमिति अर्थात् मानव शास्त्रीय आंकड़ों का विश्लेषण था। 1955 - 1967 तक वे स्वतंत्र भारत के पहले योजना आयोग(Planning Commission) के सदस्य भी रहे थे।
इनके तीन कार्य जिनका सांख्यिकी क्षेत्र में बहुत योगदान और महत्व है। वे निम्नलिखित हैं -
1. मानवशास्त्रीय सर्वेक्षण (Human Classical Survey)
2. बड़े पैमाने पर नमूना सर्वेक्षण (Sample Survey)
3. फ्रैकटाइल चित्रात्मक विश्लेषण (Fractile Graphical Analysis)
इनके सांख्यिकी के महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए 2007 में केंद्र सरकार ने इनके सम्मान में 29 जून को इनके जन्मदिवस को राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। सामाजिक - आर्थिक नियोजन और नीति तैयार करने में, सांख्यिकी के महत्व के बारे में जान जागरूकता पैदा करने के लिए भारत में प्रत्येक वर्ष 29 जून को राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस मनाया जाता है। इस दिन को प्रत्येक वर्ष एक थीम भी दी जाती है। इस वर्ष की थीम है ‘उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली एवं लैंगिक समानता’ (Good Health and well being and Gender Equality)। इस दिन राष्ट्रीय विकास में सरकारी सांख्यिकी को उजागर करने के लिए देशभर के कार्यालयों, कॉलेजों आदि में संगोष्ठियों, चर्चाओं, व्याख्यानमालाओं, वाद-विवाद प्रतियोगिताओं आदि का आयोजन भी किया जाता है।
सीमा शर्मा


Bahut aachi jankari h. 🙏🙏
जवाब देंहटाएंधन्यवाद
हटाएंआंकड़ा हर व्यक्ति के जीवन में विशेष महत्व रखता है अतः बहुत ही सुंदर उत्तम प्रेरणात्मक आलेख है।
जवाब देंहटाएंधन्यवाद
हटाएंVery rare information.....nice post👍
जवाब देंहटाएंThanks
हटाएंData jaise boring vishay ki jaankaari achhe roop men prastut ki h saral bhasha men. Very good ��
जवाब देंहटाएंधन्यवाद
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