वन्दे मातरम्, सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्,
शस्यश्यामलां मातरम्, वन्दे मातरम्।
दोस्तों! यह गीत तो सभी ने सुना, गाया, पढ़ा और देखा अवश्य होगा। यह हमारा राष्ट्रगीत 'वन्दे मातरम्' है। क्या आप जानते हैं यह गीत किसने लिखा? यह गीत बांग्ला कवि, लेखक, पत्रकार और साहित्यकार बंकिम चंद्र चटर्जी/चट्टोपाध्याय द्वारा लिखा गया है।
आइए, आज हम बंकिम चंद्र चटर्जी के बारे में बात करते हैं। इनका जन्म २७ जून, १८३८ को बंगाल के उत्तरी २४ परगना के कंठालपाड़ा के नैहाटी में हुआ था। इनकी शिक्षा हुगली और प्रेसीडेंसी कॉलेज से हुई थी। प्रेसीडेंसी कॉलेज से १८५७ में स्नातक की उपाधि लेने वाले ये पहले भारतीय थे।
बांग्ला साहित्य को इनकी बड़ी देन है। इन्होने बांग्ला साहित्य को बहुत समृद्ध किया। इनकी कुछ प्रमुख रचनाएँ हैं-दुर्गेश नंदिनी, कपाल कुंडला, विषवृक्ष, कृष्णकांतेर दफ्तर, आनंदमठ, मृणालिनी, इंदिरा, राधारानी, देवी चौधरानी, मोचीराम गौरेर जीवनचरित, ललित ओ मानस (कविता संग्रह) आदि। इसके अलावा इन्होने मासिक पत्रिका-बंगदर्शन का भी प्रकाशन किया था। बांग्ला साहित्य के उत्थान में इन्होने अग्रणी भूमिका निभाई। ये अंग्रेजी और बांग्ला भाषा में लिखते थे। इनकी अधिकांशतः रचनाओं का हिंदी के साथ-साथ अनेक भाषाओँ में भी अनुवाद किया गया है।
इनका सबसे बड़ा योगदान तो हमारे देश को 'वन्दे मातरम्-राष्ट्रगीत' है। यह गीत इनके प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ में भी प्रयोग हुआ है। मूलतः यह गीत संस्कृत में ही लिखा गया है। इसकी धुन का कार्य यदुनाथ भट्टाचार्य ने किया था। इसे गाने में लगने वाला समय 1 मिनट और 5 सैकेंड है। संस्कृत शब्द वन्दे मातरम् का हिंदी में अर्थ 'माता की वंदना करता हूँ' होता है। अरविन्द घोष ने इस गीत का अंग्रेजी गद्य-पद्य में अनुवाद किया।
बंकिम चंद्र चटर्जी ने इस गीत की रचना १८७६ में ब्रिटिश शासकों के सरकारी समारोहों में अनिवार्य रूप से गाए जाने वाले गीत 'गॉड! सेव द क्वीन' से आहत होकर भारत माता की वंदना के रूप में की थी । प्रारम्भ में इसके २ ही पद रचे गए थे, जो शुद्ध रूप से संस्कृत भाषा में ही थे। १८८२ में जब इन्होने 'आनंदमठ' नामक उपन्यास लिखा तो देशभक्ति से परिपूर्ण यह गीत भी इसमें शामिल कर लिया। यह उपन्यास उस समय के सन्यासी विद्रोह पर आधारित था। इसमें यह गीत भी भवानन्द नामक साधु द्वारा गाया जाता है। इसलिए प्रारम्भ के २ पदों के बाद के सभी पद बांग्ला भाषा में ही हैं, जो उपन्यास के लिए ही रचे गए थे। प्रारम्भ के दो पदों में जहां संस्कृत में भारत माँ की वंदना की गयी है , वहीं बाद के सभी पदों में बांग्ला में माँ दुर्गा की स्तुति की गई है।
इतिहास साक्षी है कि इस गीत का राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन में जोश भरने में अहम किरदार रहा था। आजादी के बाद आज भी यह गीत भारत के जन-मानस पर राष्ट्रगीत के रूप में आज भी देशभक्ति की भावना भरने में उतना ही सक्षम है, जितना आजादी से पहले था।
वंदनीय 'बंकिम चंद्र चटर्जी' को, नमन हम करते हैं।
भारत के जन-मानस में जो, 'वन्दे-मातरम्' भरते हैं।
सीमा शर्मा
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बहुत अच्छा।यह गीत हर भारतीय के अन्दर देशभक्ति की भावना को जागृत करता है।
जवाब देंहटाएंहां जी, बिल्कुल सही कहा आपने।
हटाएंसंस्कृति संस्कृत धार्मिकता एवं राष्ट्र के प्रति समर्पण को दर्शाता यह अद्भुत गीत धन्यवाद है लेखिका को जिन्होंने इस गीत पर लेखनी चलाई है ।जब-२ आदि कवि द्वारा रचित रामायण का संस्मरण होता है तब तब वर्तमान सदी के संस्कृत निष्ठ गीतों में यह राष्ट्र गीत भी संस्मरण होता रहेगा जिसने स्वतंत्रता में मुख्य भूमिका निभाई । वंदे मातरम्
जवाब देंहटाएंधन्यवाद
हटाएंSalaam h Shri Bankim Chandra Chattopadhyay Ji ko jinhone itna achha desh bhakti se ot-prot geet likha.
जवाब देंहटाएंSaty Vachan
हटाएंवन्दे मातरम् के लेखक के बारे में जानकारी के लिए धन्यवाद।
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