आज टेक्नोलॉजी की दुनिया में नित नए आविष्कार हो रहे हैं। नित नई मशीनें मनुष्य की सुख-सुविधाएँ बढ़ा रही हैं इसी सुविधा में एक नाम स्मार्ट फ़ोन का भी है, जो आज के समय बहुत ही महत्त्वपूर्ण आवश्यकता है।
क्या आप जानते हैं विश्व का पहला स्मार्ट फ़ोन कहाँ और कब लॉन्च हुआ था? वह कौनसी कंपनी का था? उसका क्या नाम था वगैरह वगैरह।
चलिए हम आपको बताते हैं ये कब, कहाँ और किसने लॉन्च किया था?
२३ नवम्बर १९९२ को इंटरनेशनल बिज़नस मशीन कॉरपोरेशन (आई बी एम ) ने अमेरिका में दुनिया का पहला स्मार्ट फ़ोन 'एंगलर' पेश किया था, पर यह कॉमर्शियल नहीं था। १९९४ में आई बी एम ने ही पहला कॉमर्शियल फ़ोन 'साइमन पर्सनल कम्यूनिकेटर' लॉन्च किया। यह विश्व का पहला स्मार्ट फ़ोन माना जाता है।
आज तो अनेकों देशों और अनेकों कंपनियों के स्मार्ट फ़ोन बाज़ार में उपलब्ध हैं, सभी तरह के महंगे-सस्ते दामों में मिल जाते हैं। सभी तरह की कीमत में उपलब्ध होने के कारण आज यह लक्ज़री गाड़ी वाले से लेकर रद्दी वाले कबाड़ी तक की पहुँच में आ गया है।
आज जब-जिसे-जहाँ देखो स्मार्ट फ़ोन में ही व्यस्त दिखाई देता है। रास्ते में चलते, मीटिंग में बैठे, जहाँ चाहे सब फ़ोन पर ही उँगलियाँ घुमा रहे होते हैं। मैट्रो ट्रैन में तो सब ईयरफ़ोन या लीड लगाए स्मार्टफोन में ही खोये रहते हैं।
कोरोना काल में भी स्मार्ट फ़ोन ने बहुत अहम भूमिका निभाई है। बच्चों की ऑनलाइन क्लास, वर्क फ्रॉम होम, मीटिंग्स, वेबिनार्स, वीडिओ कॉन्फ्रेंस आदि बहुत हद तक स्मार्ट फ़ोन पर ही संभव हुआ है, क्योंकि हर किसी के पास कंप्यूटर या लैपटॉप की सुविधा नहीं है। किसी के पास घर पर कंप्यूटर या लैपटॉप सुविधा है तो भी एक ही समय में घर में दो बच्चों की ऑनलाइन क्लास एवं माता-पिता का वर्क फ्रॉम होम तो स्मार्ट फ़ोन से ही संभव हुआ।
इस मुश्किल वक्त
में लोगों ने दूर बैठे अपनों से भी वीडिओ कॉल द्वारा पास होने का अहसास किया है।
बहुत से लोगों ने इसे एक अवसर के रूप में लेते हुए ऑनलाइन ही काफ़ी चीज़ें सीखकर
अपना नया काम भी ऑनलाइन ही शुरू कर दिया है।
परन्तु इसका एक चिंताजनक पहलू भी है। यह पहलू है-इसके कारण घर के सदस्यों के मध्य में बढ़ने वाली दूरियाँ। हाँ, यह सच है। स्मार्ट फ़ोन के कारण आज एक ही घर में रहने वाले तीन-चार सदस्य अलग-अलग कमरों में या कोनों में बैठे रहते हैं। घर के सदस्यों ने साथ में बातें करना, हंसी-मज़ाक करना, हँसना-खिलखिलाना और साथ में खेलना तक छोड़ दिया है। एक ही छत के नीचे दम्पति और बच्चे अज़नबियों की तरह रहते हैं। इसके कारण रिश्तों में दरार आने लगी है। परिवार के सदस्यों में झगड़े बढ़ने लगे हैं। एक-दूसरे पर क्रोध करना, तेज़ आवाज़ में चिल्लाना, चिड़चिड़ापन आदि समस्याएँ आने लगी हैं।
हमें इस स्थिति पर जल्द ही कदम उठाते हुए इसे दूर करना होगा। अन्यथा एक दिन यह सुविधा हमारे हँसते-खिलखिलाते घरों को तोड़कर हमें अकेलेपन के सागर में डुबो देगी जो एक बहुत बड़ी समस्या है।
इससे निज़ात पाने के लिए हमें अपने परिवार के साथ समय बिताना चाहिए। उनसे बातें करना, खेल खेलना, साथ में भोजन करना, हंसी-मज़ाक करना आदि क्रियाकलाप करने चाहिए।
अंत में याद रखिए स्मार्ट फ़ोन का उपयोग हमारे हाथ में है। हम उसे नियंत्रित करते हैं, वह हमें नहीं। मनुष्य ने स्मार्ट फ़ोन बनाया है, स्मार्ट फ़ोन ने मनुष्य को नहीं।
साथ रहिये, खिलखिलाते रहिए
अपनों से भी बातें करते रहिए
सीमा शर्मा


Ekdm shi kaha aapne. Lockdown m 1 or jahan smartphone ka use badha h to dusri or pareshaniyan bhi lekr aaya h - health and relationship problems. Sabhi logon ko apne svasthya ka dhyaan rakhna chahiye or screen time km hi rakhna chahiye.
जवाब देंहटाएंEKDAM SAHI KHA AAPNE.
हटाएंEKDAM SAHI KHA AAPNE.
हटाएंसम- सामयिक विषय पर जानकारी देता सटीक लेख
जवाब देंहटाएंDHANYWAD
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