अपना ख़ून होना, ख़ून सूखना, ख़ून का घूँट पीकर रह जाना, ख़ून पसीना एक करना, ख़ून पीना, ख़ून सफ़ेद होना, ख़ून खौलना, काटो तो ख़ून नहीं, ख़ून का प्यासा.......... अरे रे नहीं नहीं यहाँ कोई हिंदी मुहावरों की कक्षा नहीं चल रही है, न ही मैं आपको हिंदी मुहावरे पढ़ाने वाली हूँ ।
आप सोच रहे होंगे फिर इतने सारे हिंदी मुहावरे क्यों लिखे हैं? अरे भई ! अपनी सोच के घोड़े को थोड़ी तो लगाम दीजिए। मैं यह स्पष्ट करूँ कि यहाँ इतने मुहावरे क्यों हैं, इससे पहले आप में से किसी ने भी एक सामान्य बात पर ग़ौर किया क्या, जो यहाँ दिए गए मुहावरों में छिपी है?
जी हाँ ! आपने सही पहचाना। इन सभी मुहावरों में जो सामान्य बात है, वह है 'ख़ून ' शब्द का प्रयोग करना। अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्यों किया गया है? तो लीजिए ज़नाब मैं आपकी ये दुविधा भी दूर कर देती हूँ। दोस्तों! आज 'विश्व रक्त दाता दिवस' है। 'ख़ून' का एक पर्याय 'रक्त' भी है। जी हाँ! 'रक्त', यह वही रक्त है जो मेरी, आपकी और सभी प्राणियों की शिराओं में बहता है - लाल रंग का तरल पदार्थ।
विश्व स्वास्थ्य
संगठन (W.H.O.) ने वर्ष २००४ में इसे १४ जून को मनाने की
घोषणा की थी। तब से प्रति वर्ष इसे १४
जून को पूरे विश्व में मनाया जाता है। आज ही के दिन
रक्त के वर्ग बताने वाले प्रसिद्ध वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टीनर का जन्मदिवस
भी है। इस खोज़ के लिए इन्हें वर्ष १९३० में नोबेल पुरस्कार भी दिया गया था।
इस दिवस को मनाने का उद्देश्य है कि रक्तदान के प्रति लोगों को जागरूक किया जाए। रक्तदान को महादान भी कहा गया है, क्योंकि रक्तदान से हम किसी व्यक्ति को जीवनदान भी दे सकते हैं। लोगों में रक्तदान को लेकर कुछ भय या भ्रांतियाँ हैं, जैसे- रक्तदान से हम कमज़ोर हो जायेंगे या बीमार हो जायेंगे आदि। परन्तु ऐसा कुछ भी नहीं होता है। यदि एक स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान करता है तो उसके शरीर में यह रक्त कुछ दिनों में पुनः बन जाता है।
चिकित्सक कहते हैं कि एक स्वस्थ और युवा व्यक्ति एक वर्ष में चार बार तक रक्तदान कर सकता है, अर्थात् प्रत्येक तीन महीने के अन्तराल पर यह किया जा सकता है। इसलिए स्वस्थ और युवा लोगों को समय-समय पर रक्तदान करते रहना चाहिए, जिससे चिकित्सालयों के ब्लड बैंकों में यह पर्याप्त मात्रा में रहे। यदि ब्लड बैंकों में यह पर्याप्त मात्रा में रहेगा तो ख़ून की कमी से किसी की मौत नहीं होगी। शोध से पता चला है कि भारत में प्रत्येक वर्ष ३० लाख लोगों की मौत केवल खून की कमी से हो जाती है। यदि भारत की एक फ़ीसदी जनता भी रक्तदान करे तो इनमें से एक भी मौत नहीं होगी।
दोस्तों! हम यह कर सकते हैं, यदि हमने एक भी व्यक्ति की जान बचाई तो बहुत बड़ा और पुण्य का काम होगा। इसलिए जीवन में कम से कम सभी को एकबार रक्तदान अवश्य करना चाहिए। बहुत सुकून मिलता है जब हमारे कारण किसी की जान बचती है।
इस वर्ष रक्तदान
दिवस का नारा भी यही कहता है- रक्त दें और दुनिया को एक सेहतमंद जगह बनाएँ।
सीमा शर्मा


सुंदर भावपूर्ण आलेख रचयिता को अभिनंदन एवं उस पर अपने एक अलग चिंतन परक विचार भी रख रहा हूं ।
जवाब देंहटाएंरक्त कासंबंध संपूर्ण जीवन अस्तित्व से है जो माता के गर्भनाल से मिलना शुरू होता है जो बाद में दूध से बनता है और फिर इस प्रकृति के प्रदत्त अन्न-जल कन्द मूल फलादि से , अर्थात इस जीवन में जो भी खून बना है वह उस परमेश्वर ने किसी के माध्यम से इसको सींचा है अतः प्रत्येक मनुष्य का अपनी जननी जन्मभूमि संस्कृति प्रकृति अथवा यूं कहें कीस धर्म बिना खून दिए रक्षित नहीं हो सकता तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। वंदे मातरम्
DHANYWAD
हटाएंएकदम सही.... मै आपकी बात से 100 प्रतिशत सहमत हूं। सभी को रक्तदान करना चाहिए। इस प्रेरणादायक लेख को लिखने के लिए धन्यवाद
जवाब देंहटाएंAAPKA BAHUT BAHUT AABHAR.
हटाएंरक्त दान के लिए आज के परिपरेक्ष्य में प्रेरणा दायक पोस्ट है आप की
जवाब देंहटाएंDHANYWAD
हटाएंबिल्कुल सही कहा है आपने। रक्तदान महादान। ऐसे ही अच्छे अच्छे ब्लोग लिखते रहिए।
जवाब देंहटाएंDHANYWAD
हटाएंRaktdan - Mahadan......100% shi....Bharat desh ke sabhi yuva ko raktdan avashya Krna chahiye.
जवाब देंहटाएंDHANYWAD
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