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शनिवार, 16 जनवरी 2021

महा टीकाकरण अभियान (MEGA VACCINATION PROGRAMME)

 

वैक्सीन लगवाओ ए दोस्तों, कोविड भगाओ ए दोस्तों।

आगे आओ ए दोस्तों, भ्रम न फैलाओ ए दोस्तों।

 

वैक्सीन जो तुम लगवाओगे, कोरोना को तुम भगाओगे।

स्वस्थ फिर तुम बन जाओगे, तो अब लाईन में आओ ए दोस्तों।

वैक्सीन लगवाओ ए दोस्तों, कोविड भगाओ ए दोस्तों।

 

कैद बहुत दिन रह लिए, दर्द बहुत अब सह लिए।

आँसू बहुत अब बहा दिए, खुशियाँ फैलाएँ आओ ए दोस्तों।

वैक्सीन लगवाओ ए दोस्तों, कोविड भगाओ ए दोस्तों।

 

चिंता-निराशा को छोड़कर, बन्दिशों को अन तोड़कर।

वैक्सीन की तरफ खुद को मोड़कर, कोरोना को भगाओ ए दोस्तों।

वैक्सीन लगवाओ ए दोस्तों, कोविड भगाओ ए दोस्तों।

 

जिंदगी पटरी पर लगे दौड़ने, स्वजनों को अकेले न पड़े छोड़ने।

एक-दूजे से हमें जोड़ने, है ये संजीवन अपनाओ ए दोस्तों।

वैक्सीन लगवाओ ए दोस्तों, कोविड भगाओ ए दोस्तों।




शुक्रवार, 15 जनवरी 2021

सेना का जवान (INDIAN ARMY DAY- सेना दिवस)

हर पल सीमा पे जो खड़ा, वो सेना का जवान है।

हे मेरे देश के रक्षक, हम सबको तुझ पर अभिमान है।

 

हम दिवाली पर दीप जलाएं, इसलिए तुम स्व-स्वप्नों को जलाते हो।

हम रंगों की खेलें होली, तुम खून की पिचकारी चलाते हो।

तुमसे है हर त्योहार रंगीला, तू तो वतन की शान है।

हे मेरे देश के रक्षक, हम सबको तुझ पर अभिमान है।

 

चैन की नींद हम तब सोते हैं, जब तुम पहरेदारी करते हो।

हम शांतिमय जीवन जीते हैं, पर तुम हरपल सीमा पर मरते हो।

हम होते मौत देख भयभीत, पर तुम्हारे लबों पर मातृभूमि गान है।

हे मेरे देश के रक्षक, हम सबको तुझ पर अभिमान है।

 

कुटुंबियों और स्वजनों की याद, तुझे भी आती तो होगी।

बीवी और बच्चों की आँखें, तुझे भी बुलाती तो होंगी।

पर कर्त्तव्यनिष्ठ बन तू डटा है, तुझसा कौन महान है?

हे मेरे देश के रक्षक, हम सबको तुझ पर अभिमान है।

 

मंगलवार, 12 जनवरी 2021

विवेकानंद जी की शिक्षाओं का आधुनिक समय में उपयोग

     

आज 12 जनवरी को विवेकानंद जी का जन्मदिवस है, इसे हम युवा दिवस के रूप में भी मनाते हैं। विवेकानंद जी ने भारत में ही नहीं अपितु विदेशों में भी भारतीय धर्म की पताका लहराने का कार्य किया। इन्होने युवावस्था में ही अमेरिका के शिकागो शहर में विश्व धर्म सम्मेलन में भाग लेकर अपना विश्व प्रसिद्ध भाषण हिन्दी में देकर भारत एवं भारतीय धर्म को एक अलग ही स्थान प्रदान किया था। आज हम यहाँ उनके द्वारा दी गई शिक्षाएँ एवं आधुनिक समय में भी उनकी उपयोगिता पर प्रकाश डालेंगे।

शिक्षाएँ और उनकी उपयोगिता-

1.   उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त नहीं हो जाता।

उपयोगिता- आज की युवा पीढ़ी जब मुश्किलों से घबराने लगती है और हार मानने लगती है, तब स्वामीजी की यह शिक्षा उनमें नया जोश भरने का कार्य करती है।

2.   सच्चा पुरुष वही होता है जो हर परिस्थिति में नारी का सम्मान करे।

उपयोगिता- आधुनिक समय में चारों तरफ नारी के साथ होते अमानवीय व्यवहार को देखते हुए यह शिक्षा अगर बालकों को बचपन से ही घर-परिवार-विद्यालय और समाज में दी जाए तो नारी के प्रति होने वाले अपराध और बर्बरता स्वत: ही समाप्त हो जाएंगे।

3.   लक्ष्य पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए।   

उपयोगिता-  यह शिक्षा विशेषत: विद्यार्थी वर्ग के लिए उपयुक्त है। उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी सोशल नेटवर्किंग के जाल में फँस कर अपने लक्ष्य पर ध्यान नहीं केन्द्रित कर पाते हैं और भटक जाते हैं। यह शिक्षा लेकर वे अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।

4.       हर आत्मा ईश्वर से जुड़ी है, करना ये है कि हम इसकी दिव्यता को पहचानें।

उपयोगिता-  आज चारों तरफ जब धर्म सांप्रदायिक लोगों के कारण अनेक बार देश को कठिन वक्त से गुजरना पड़ता है, तब यह शिक्षा बालकों को बचपन से ही दी जानी चाहिए जिस से वे सभी धर्मों का सम्मान करना सीखें और अपने धर्म पर भी अडिग रह सकें।

5.       एक विचार लें और इसे ही अपनी जिंदगी का एकमात्र विचार बना लें। इसी विचार के बारे में सोचें, सपना देखें और इसी विचार पर जीएं।

उपयोगिता- कभी-कभी युवा पीढ़ी एक साथ कई विचार लेकर असमंजस में होती है, वो समझ नहीं पाती है कि उनको भविष्य में करना क्या है? ऐसी परिस्थिति में स्वामीजी कि इस शिक्षा के द्वारा उनका उचित मार्ग-दर्शन किया जा सकता है।

6.       एक समय में एक काम करो और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमें डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ।

उपयोगिता- कई बार हम देखते हैं कि कुछ लोग एक ही समय में एक साथ कई कार्य कर रहे होते हैं, इसके परिणामस्वरूप इन्हें उतनी सफलता नहीं मिल पाती जितनी मिलनी चाहिए और यह कार्य भी उतना उच्च स्तर का नहीं हो पाता जितना होना चाहिए था। तब व्यक्ति निराश भी हो जाता है, ऐसे में इस शिक्षा को अपना कर वह एक समय में एक ही कार्य करके उसमें सफलता प्राप्त कर सकता है।

7.       एक अच्छे चरित्र का निर्माण हजारों बार ठोकर खाने के बाद ही होता है।

उपयोगिता- कई बार अपने ऊपर आई मुसीबतों और संकटों से घबराकर व्यक्ति अपनी अच्छाइयों को छोड़ने का प्रयास करता है। इस शिक्षा को जीवन में अपनाकर लोग अपनी अच्छाइयों को बनाए रख सकते हैं।

8.       खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है।

उपयोगिता- छोटी-छोटी असफलताओं को देखकर मनुष्य कभी-कभी घबरा जाता है और स्वयं को कमजोर समझने लगता है। यह शिक्षा उनको खुद को कमजोर बनाने से बचाती है।

9.       जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते तब तक आप भगवान पर विश्वास नहीं कर सकते।

उपयोगिता- निराश और हताश इंसान अपने ऊपर विश्वास करना छोड़ देता है। यह शिक्षा उसे बताती है कि ईश्वर का एक और नाम विश्वास भी है, इसलिए सबसे पहले स्वयं पर विश्वास करो।

10.    चिंतन करो, चिंता नहीं, नए विचारों को जन्म दो।

उपयोगिता- आज की युवा पीढ़ी में धैर्य और सहनशीलता नहीं है। उन्हें हर कार्य का फल तीव्र गति से और तुरंत चाहिए होता है। ऐसे में किसी चीज का परिणाम देर से या मनोनुकूल नहीं आता है तो वे तनाव और अवसाद में आ जाते हैं। इस परिस्थिति में स्वामीजी की इस शिक्षा द्वारा उनको चिंता-मुक्त करते हुए चिंतन के लिए प्रेरित किया जा सकता है। नए विचारों पर अमल किया जा सकता है।



शुक्रवार, 1 जनवरी 2021

नूतन वर्षाभिनंदनम्

 

स्वागतम् सुस्वागतं, नूतन वर्ष सुस्वागतम्।

पूर्व वर्ष समापनं, नूतन वर्ष त्वम् आगतम्।।

 

सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य-वृद्धि, हृदय-शुद्धिं दायकम्।

ज्ञान-गंगा, विज्ञान-तुङ्गा, संगीत-मृदंगा वादकम्।।

स्वागतम् सुस्वागतं, नूतन वर्ष सुस्वागतम्।

 

मंगल-करणम्, दारिद्र्य-हरणम्, भव तव मनोहरम्।

विगत वर्षे अभवत् यः, ते सङ्कटा: त्वरित विरम्।।

स्वागतम् सुस्वागतं, नूतन वर्ष सुस्वागतम्।

 

मानव-मात्रम्, सुपात्रम्, सर्व-सुख प्रदायकम्।

सर्वे प्राणी: सुखी भवन्तु, एवमस्तु याचकं।।

स्वागतम् सुस्वागतं, नूतन वर्ष सुस्वागतम्।

 

स्वप्न-पूर्णम्, पीडा-चूर्णम्, भविष्य उज्ज्वलम् करणम्।

सर्व-शक्तिमान् त्वम्, सर्वे नमन्ति तव चरणं।।

स्वागतम् सुस्वागतं, नूतन वर्ष सुस्वागतम्।

 

भारतवर्षम् भव विश्वगुरु:, सह्योगं करवाम वयम्।

राष्ट्रध्वज: भारतस्य, सदैव भव उच्चैः उच्चम्।।

स्वागतम् सुस्वागतं, नूतन वर्ष सुस्वागतम्।



 

 

गुरुवार, 31 दिसंबर 2020

2020 का सबक़

 2020 तुम जाओ, ना अब तुमसे कुछ गिला है।

वह सब तुमने सिखाया, जो किसी से भी ना मिला है।

 

कहते हैं सब कि, तुम आए, कोरोना लाए।

रोजगार काम धंधे, सब तुमने छुड़वाए।

सपने जो देखेतुमने  वह भी तुड़वाए।

तुम्हारी मार से, बचा ना कोई गांव-जिला है।

2020 तुम जाओ, ना अब तुमसे कोई गिला है।

 

कितनों से तुमने उनके, अपने छीन लिए।

कितनों की छत छीनी, कितने घर-हीन किए।

कितने सेठ-साहूकार, तुमने दर-दीन किए।

कितनों का विश्वास डगमगाया और हिला है।

2020 तुम जाओ, ना अब तुमसे कुछ गिला है।

 

माना तुमने सबको, बेड़ियों में जकड़ दिया।

सारी दुनिया को डावांडोल, और गड़बड़ किया।

जैसे सब को समय ने ही, रोका और पकड़ लिया।

लगता हर दिन जैसे, रहस्य भरा एक किला है।

2020 तुम जाओ, ना अब तुमसे कुछ गिला है।

 

लेकिन इन सबके अलावा, तुमने बहुत कुछ सिखाया है।

अनेकों एकाकी लोगों को, अब रिश्ते निभाना आया है।

निराशा के अंधेरे में तुमने, आशाओं का उजाला फैलाया है।

हर अंधेरी रात के बाद, सुनहरे प्रभात का सिलसिला है।

2020 तुम जाओ, ना अब तुमसे कुछ गिला है।



बुधवार, 16 सितंबर 2020

विश्व ओजोन दिवस

      आज 16 सितंबर को विश्व ओजोन दिवस है ।ओजोन परत का नाम तो सभी ने सुना ही है । 'ओजोन परत में छेद हो गया है' यह भी हम सभी पिछले कुछ वर्षों से सुनते आ रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ओजोन परत क्या है ? इसमें छेद कैसे हुआ ? ओजोन दिवस मनाने की शुरुआत कब से और क्यों हुई ? अनेक सवाल हैं जिनके जवाब हममें से बहुत कम लोग ही जानते हैं। आइए ! अब समय आ गया है कि हमें इन सभी के बारे में जानना चाहिए । ओजोन परत को बचाने में अपना योगदान देना चाहिए और दूसरों को भी जागरूक करना चाहिए।

   ओजोन परत हमारी धरती के वायुमंडल का एक आवरण या पर्दा है। इसमें ओजोन नामक गैस की मात्रा अपेक्षाकृत सघन या गहरी होती है। इसी ओजोन परत के आवरण के कारण पृथ्वी पर हमारा जीवन संभव होता है, क्योंकि यही आवरण सूर्य से आने वाली तेज पराबैंगनी किरणों को लगभग 93-99 प्रतिशत तक अपने अंदर सोखकर धरती पर आने से रोकती है। अन्यथा यह पृथ्वी पर विनाशकारी और जीवन पनपने के लिए भारी पड़ती है। धरती के वायुमंडल की 91 प्रतिशत से भी ज्यादा ओजोन गैस इसी क्षेत्र में रहती है । इसीलिए इसे ओजोन परत कहते हैं।

   ओजोन परत की खोज फ्रांस के भौतिक वैज्ञानिकों  फैबरी चार्ल्स और हेनरी बुसोन ने 1913 में की थी ।ओजोन परत के गुणों और आवश्यकता के बारे में विस्तृत रूप से ब्रिटेन के मौसम वैज्ञानिक जी एम बी डोबसन ने अध्ययन किया था । उनके द्वारा एक सरलता पूर्वक भूतल से ओजोन को मापने का मीटर बनाया गया, जिसे स्पेक्ट्रोफोटोमीटर के नाम से जाना जाता है।डोबसन ने विश्व भर में ओजोन की निगरानी के लिए नेटवर्क स्थापित किया, जो अभी भी कार्यरत है। उनके इसी महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए उनके सम्मान में ओजोन की मात्रा मापने की इकाई का नाम भी डोबसन इकाई रखा गया।

      वर्ष 1985 मैं सर्वप्रथम ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे के वैज्ञानिकों द्वारा ओजोन परत के छेद की खोज की गई। इस छेद के लिए सी एच सी अर्थात क्लोरोफ्लोरोकार्बन नामक हानिकारक गैस को उत्तरदाई माना गया। तत्पश्चात इस हानिकारक गैस की रोक के लिए विश्व के सभी देश एकमत हुए और 16 सितंबर 1987 में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर दस्तखत किए गए।

         16 सितंबर 1994 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने ओजोन परत की सुरक्षा एवं बचाव के लिए 'अंतर्राष्ट्रीय ओजोन दिवस' मनाने की घोषणा की। इसके अगले वर्ष प्रथम विश्व ओजोन दिवस 16 सितंबर 1995 में मनाया गया। तब से प्रत्येक वर्ष यह दिवस मनाया जाता है। इसे मनाने का मुख्य उद्देश्य ओजोन परत के बारे में सभी को जागरूक करना और इसे बचाने के उपायों की तरफ ध्यान केंद्रित करना है।

     वर्तमान समय में मानव धरती पर रहते हुए भी चांद, मंगल और ना जाने कहां-कहां जीवन की संभावनाएं तलाश रहा है। परंतु जिस जीवनदायिनी धरती पर रहता है, उसी की सुरक्षा के प्रति लापरवाह हो गया है। वह भूल गया है कि वह विकास की अंधी दौड़ में एक दूसरे से आगे बढ़ने के चक्कर में अपनी स्वर्ग जैसी धरती को नर्क जैसी पीड़ादायिनी बना रहा है । वह भूल गया है कि इस धरती पर जीवन को पनपने में करोड़ों साल लगे थे । बहुत संघर्ष के बाद यह धरती जीवनदायिनी बनी थी। आज वही इंसान प्रकृत से असीमित छेड़छाड़ कर उसे विध्वंसकारी बना रहा है । इसके परिणाम समय-समय पर प्राकृतिक आपदाओं के रूप में देखने को मिलते रहते हैं। परंतु मनुष्य आंखें मूंदे बैठा है । इसी प्राकृतिक छेड़छाड़ के फलस्वरुप ओजोन परत में छेद भी बढ़ता जा रहा है। इसके बचाव के लिए फोम के गद्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाए , प्लास्टिक के प्रयोग पर रोक लगे, ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाएं , वनों के कटाव पर नियंत्रण हो आदि प्रयास करने होंगे।

     ओजोन परत को बचाने के लिए बाजार में ओजोन फ्रेंडली फ्रिज, एसी, कूलर आ गए हैं। उनका प्रयोग करें गाड़ियों से फैलने वाले प्रदूषण, फैक्ट्रियों - कारखानों का धुआं , जंगलों में लगने वाली आग आदि भी ओजोन परत को नुकसान पहुंचाते हैं । मनुष्य की अगली पीढ़ियां स्वस्थ माहौल में सांस ले सके इसके लिए ओजोन परत की सुरक्षा की मुहिम में अपना योगदान देना होगा।

      वर्ष 2020 में विश्व ओजोन दिवस की थीम है- 'जीवन के लिए ओजोन : ओजोन परत संरक्षण के 35 साल।' इस वर्ष वैश्विक ओजोन परत संरक्षण के 35 वर्ष पूरे हो गए हैं। यह मुहिम 1985 से प्रारंभ हुई थी। यह थीम हमें यह भी बताती है कि पृथ्वी पर जीवन के लिए ओजोन कितना महत्वपूर्ण है। इसलिए अपनी भावी संतानों को हम जीवन के लिए स्वस्थ पर्यावरण और पृथ्वी भेंट में दे सकें इसके लिए आज और अभी से सब को प्रयास करना होगा।

ओजोन परत





मंगलवार, 15 सितंबर 2020

अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस

  भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। इसलिए लोकतंत्र का अर्थ जानने के लिए भारत से बेहतर कोई स्थान नहीं हो सकता। आज 15 सितंबर अर्थात अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस है। लोकतंत्र अर्थात जहां जनता को अपना नेता, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति आदि चुनने की स्वतंत्रता हो । अपने विचार व्यक्त करने की आजादी हो और अपने धर्म पर चलने की स्वतंत्रता हो। सरल भाषा में कहें तो हर तरह की आजादी हो, जब तक किसी दूसरे की आजादी को नुकसान न पहुंचता हो ।आज विश्व में लोकतंत्र दिवस मनाने का कारण भी यही है, क्योंकि आजादी हर किसी को पसंद होती है। हिंदी में कहा भी गया है-

'पराधीन सपनेहु सुख नाहीं' अर्थात गुलामी या परतंत्रता में तो सपने में भी सुख नहीं है।

  अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस की शुरुआत कब और क्यों हुई? वर्ष 2007 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस दिवस को मनाने की घोषणा की। इसका प्रमुख उद्देश्य लोकतंत्र का प्रचार करना और इसके प्रचार-प्रसार के लिए किए जाने वाले राष्ट्रीय कार्यक्रमों में मजबूती लाना है। इसके माध्यम से विश्व को सुशासन की सौगात देना भी है ।लोकतंत्र की परिभाषा के रूप में सभी ने विद्यालय शिक्षा में पढ़ा है । सबसे प्रसिद्ध परिभाषा अब्राहम लिंकन की है जो प्रत्येक व्यक्ति को याद है- "लोकतंत्र जनता का, जनता के द्वारा, जनता के लिए किया जाने वाला शासन है" लेकिन इसका मतलब सिर्फ इतना ही नहीं है। इसको हम व्यापक अर्थ में ले सकते हैं , जैसे किसी भी राष्ट्र में रहने वाले व्यक्तियों को समाज में समान अवसर प्राप्त    हों और सभी देशवासी अपने समाज की राजनीति में एक समान भागीदार बनें। इस तरह इसका अर्थ सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक रूप में व्यापक हो जाता है।

    विश्व में दो प्रकार की लोकतंत्र प्रणाली प्रचलित है -प्रथम संसदीय प्रणाली और दूसरी और द्वितीय राष्ट्रपति शासन प्रणाली। दोनों ही प्रणालियों में प्रजा अपने मताधिकार का प्रयोग अपने देश का जनप्रतिनिधि चुनने के लिए करती है । वह जनप्रतिनिधि चुने जाने के पश्चात अपने देश की प्रजा के लिए कार्य करने को प्रतिबद्ध होता है। भारत , कनाडा , इंग्लैंड , ऑस्ट्रेलिया आदि राष्ट्रों में संसदीय शासन प्रणाली लागू है , जबकि अमेरिका और कुछ अन्य राष्ट्रों में राष्ट्रपति शासन प्रणाली अपनाई गई है । जैसा कि नाम से ही परिलक्षित हो रहा है कि राष्ट्रपति शासन प्रणाली में सभी अधिकार एवं निर्णय राष्ट्रपति द्वारा लिए जाते हैं , जबकि संसदीय शासन प्रणाली में शक्ति राष्ट्रपति के पास नहीं होती है। इसमें संसद के दोनों सदनों और विशेषकर प्रधानमंत्री के मंत्रिमंडल अर्थात लोकसभा सदस्य आदि से विचार विमर्श के बाद अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री द्वारा लिया जाता है।

   भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र वाला देश है । यहां लगभग 60 करोड़ से भी ज्यादा लोग अपने मताधिकार का प्रयोग करके अपने जनप्रतिनिधि एवं सरकार का चुनाव करते हैं। लोकतंत्र ही वह धागा है जिसने इतने बड़े राष्ट्र को इतनी विविधताओं के पश्चात भी एक सूत्र में पिरो कर रखा है। यहां पर जो लोग सरकार की नीतियों या कार्यों से संतुष्ट नहीं हों तो शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख कर अपना विरोधी या असहमति जता सकते हैं।

    वर्ष 2020 जब दुनिया में कोरोना महामारी का संकट है , ऐसे में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस द्वारा कहा गया यह वक्तव्य अत्यंत महत्वपूर्ण है "ऐसे समय में जब पूरा विश्व कोविड-19 से जूझ रहा है , लोकतंत्र सूचना का मुक्त प्रवाह है। निर्णय लेने में भागीदारी और महामारी की प्रतिक्रिया के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।"

     इस वर्ष की अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस की थीम भी कोरोना को भी ध्यान में रखकर निश्चित की गई है -'कोविड-19 लोकतंत्र पर एक स्पोट-लाईट'

    कोरोना महामारी की आपदा से विश्व भर में सामाजिक,  राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक , शारीरिक , शैक्षिक , मानसिक और कानूनी चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है, ऐसे में प्रत्येक राष्ट्र इस संकट से उबरने के रास्तों को अपना रहा है ।  इस समय यह अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है कि इस संकट के समय में सभी राज्य एवं प्रदेश कानून एवं शासन को सुचारू बनाए रखें । आधारभूत सिद्धांतों की रक्षा एवं सम्मान करते रहे और विधि, इलाज एवं बचाव और न्याय एवं कानून की उचित प्रक्रिया का उपयोग करने का अधिकार सभी को प्रदान करें।

जनता जनार्दन की ताकत

 

सोमवार, 14 सितंबर 2020

हिंदी दिवस

                                        हिंदी हिंद का मन है,  मन के बिना कैसा तन है?

                                        हिंदी भाषा है राष्ट्रभाषा, इसके बिना क्या जनजीवन है?


आज 14 सितंबर हिंदी दिवस है। हिंदी को जिस स्थान पर होना चाहिए था, वह उससे बहुत दूर है। हमें इसको इसका सम्माननीय स्थान दिलाने के लिए कुछ कदम उठाने पड़ेंगे। सर्वप्रथम तो हमें हिंदी के सम्मान की बात केवल हिंदी दिवस के दिन ही नहीं, बल्कि प्रत्येक दिन करनी होगी अर्थात प्रत्येक दिवस को ही हिंदी दिवस बनाना होगा l हिंदी में बात करना शर्म की बात नहीं, बल्कि गर्व की बात होनी चाहिए l जब हमें हिंदी बोलने में गर्व का अनुभव होगा, तो हमारे अंदर आत्मविश्वास स्वत: ही आ जाएगा l आत्मविश्वास आने पर आत्मनिर्भरता भी आ जाएगी l 


कुछ लोगों को यह लग सकता है कि चारों तरफ तो अंग्रेजी एवं अन्य विदेशी भाषाओं का बोलबाला है, ऐसे में हिंदी के साथ कहां तक चल पाएंगे ? दोस्तों ! मैंने हिंदी को उसका उचित स्थान एवं सम्मान देने की बात कही है, किसी अन्य भाषा को छोड़ने या अपमान करने के लिए नहीं कहा है l हां, लेकिन किसी अन्य भाषा को सीखने के लिए अपनी भाषा को छोड़ना यह अपमान करना या उसे बोलने में शर्म अनुभव करना निसंदेह अनुचित है l जिस प्रकार हम अपनी मां को चाहे वह कैसी भी हो, किसी सुंदर अत्याधुनिक विचारों वाली पढ़ी-लिखी महिला या आंटी के लिए प्यार करना नहीं छोड़ सकते l ठीक वैसे ही हमें किसी दूसरी भाषा को पढ़ने - सीखने या उसमें जीविका चलाने के लिए मनाही नहीं है परंतु उसके लिए हिंदी को भूलना - छोड़ना गलत है l


आज तो हिंदी वैश्विक पटल पर छाने लगी है l संगणक अर्थात कंप्यूटर के जमाने में हिंदी कदम से कदम मिलाकर साथ चल रही है l गूगल पर  हिंदी में टंकण अर्थात टाइप करने के लिए अनेक सुविधाएं हैं l जिन्हें हिंदी टाइपिंग नहीं आती, वह भी आसानी से अंग्रेजी वर्णमाला के द्वारा हिंदी में टाइप कर सकते हैं l  इससे भी एक कदम आगे और बढ़ाएं तो केवल बोल कर भी आप हिंदी में लिखित रूप में प्राप्त कर सकते हैं l किसी अन्य भाषा की सामग्री को भी आप हिंदी भाषा में बड़ी आसानी से परिवर्तित कर सकते हैं l जिस तरह अंग्रेजी टाइप करते समय कंप्यूटर स्वत: व्याकरणिक रूप से शुद्ध वर्तनी के लिए लाल रेखा से बताता है वैसी ही सुविधा हिंदी टंकण में भी उपलब्ध है l


उपर्युक्त  सभी सुविधाएं आपके कंप्यूटर और मोबाइल दोनों में ही उपलब्ध है l कंप्यूटर और मोबाइल के अतिरिक्त भी हम देखते हैं कि हिंदी भाषा जगत बहुत विस्तृत है l इसमें जीविका के बहुत विकल्प उपलब्ध हैं l हिंदी माध्यम से पढ़ने वाले विद्यार्थी अनेक तरह से इसमें जीविका चला सकते हैं - जैसे अध्यापन, लेखन, पत्रकारिता, अनुवादक,  समाचार वाचक, संवाददाता, प्रशासनिक सेवा, पुलिस विभाग, पुरातत्व विभाग, पर्यटन गाइड, अभिनय, भाषा विभाग आदि  l इन सबके अलावा भी आजकल सोशल मीडिया पर ब्लॉग लेखन, यूट्यूब चैनल और वीडियो, फेसबुक, टि्वटर, इंस्टाग्राम आदि सभी पर हिंदी में धूम मची रहती है l  इन सब के माध्यम से नई पीढ़ी प्रसिद्धि के साथ-साथ धन भी कमा रही है l टेलीविजन पर बॉलीवुड फिल्में,धारावाहिक, समाचार, अनेक नृत्य - गायन के लाइव कार्यक्रम, कॉमेडी शो, कवि सम्मेलन, चर्चा, वाद-विवाद प्रतियोगिताएं, विज्ञापन आदि शब्द हिंदी में ही होते हैं l


दोस्तों ! समय परिवर्तनशील होता है, इसलिए समय के साथ बदलाव आवश्यक है, परंतु अपनी जड़ों को छोड़कर नहीं l इसलिए आइए ! आज हम अपनी जड़ों से जुड़ते हुए आधुनिक रंग रूप के साथ हिंदी को अपनाकर, उसे सबके सामने प्रस्तुत करने की प्रतिज्ञा लें l इस नए रंग रूप में हम हिंदी को कठिनाई से सरलता की तरफ, नीरसता से सरसता की तरफ और संकीर्णता से विस्तृतता की तरफ लेकर चलते हैं l


                                            हिंदी को आगे बढ़ाएंगे, हम ऊंचा  इसे उठाएंगे l

                                            एक दिन ही नहीं, हर रोज यह दिवस मनाएंगे।


                                    हिंदी  पढ़ें और पढ़ाएं,  देश को आगे बढ़ाएं l





गुरुवार, 10 सितंबर 2020

पंडित गोविंद वल्लभ पंत

 

दोस्तों ! 14 सितंबर अर्थात् हिन्दी दिवस आनेवाला है। हिन्दी भारत की राजभाषा भी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हिन्दी को राजभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने में मुख्य योगदान किसने दिया था ? ये थे भारतरत्न प्राप्त, उत्तरप्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री और भारत के चौथे गृहमंत्री पंडित गोविंद वल्लभ पंत, जिन्हें सभी जी.बी.पंत के नाम से भी जानते हैं।

पंडित गोविंद वल्लभ जी का जन्म ब्रिटिश भारत के अल्मोड़ा जिले के श्यामली पर्वतीय क्षेत्र के गाँव खूँट में 10 सितंबर 1887 को हुआ था। यह क्षेत्र वर्तमान में उत्तराखंड में स्थित है। इनके पिताजी का नाम श्री मनोरथ पंत और माताजी का नाम श्रीमति गोविंदी बाई था। गोविंद वल्लभ जी पढ़ाई में बहुत तेज थे। इन्होने 1907 में म्योर सेंट्रल कॉलेज, इलाहाबाद से बी.ए. में गणित, साहित्य और राजनीति विषयों में सर्वोच्च अंक प्राप्त किए। 1909 में यहीं से कानून की डिग्री भी सर्वाधिक अंकों के साथ प्राप्त की। इसके लिए इन्हें कॉलेज की तरफ से लेम्सडेन अवार्ड भी दिया गया। अध्ययन के साथ-साथ ही इन्होने कांग्रेस के स्वयं सेवक का कार्य करना भी शुरू कर दिया था। कानून की डिग्री लेने के बाद ये 1910 में वापस अल्मोड़ा आ गए और यहाँ वकालत शुरू कर दी। इसके लिए ये पहले रानीखेत और इसके बाद काशीपुर आ गए। यहाँ इन्होने प्रेमसभा नामक संस्था का गठन किया जिसका कार्य शिक्षा और साहित्य के प्रति जनता में जागरूकता पैदा करना था। प्रेमसभा का कार्य इतने विस्तृत स्टार पर हुआ कि ब्रिटिश स्कूलों का तो काशीपुर से सूपड़ा ही साफ अर्थात् पूरी तरह समाप्त हो गए।

गोविंद वल्लभ जी ने स्वतन्त्रता संघर्ष में भी भाग लिया। वे गांधीजी से बहुत प्रभावित थे और उन्हीं के कहने पर 1921 में असहयोग आंदोलन में कूद पड़े। 9 अगस्त 1925 को हुए प्रसिद्ध काकोरी कांड के नवयुवकों के मुकदमे की पैरवी के लिए पंत जी-जान से जुट गए थे। तब वे नैनीताल से स्वराज पार्टी के टिकट पर लेजिस्लेटिव कौंसिल के सदस्य थे। इन्होने पंडित रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक़ उल्ला खां और ठाकुर रोशन सिंह को काकोरी कांड के लिए दोषी पाए जाने पर फाँसी की सजा रुकवाने का भी भरसक प्रयास किया था। इसके लिए इन्होने पंडित मदन मोहन मालवीय जी और उस समय के भारत के वायसराय लॉर्ड इरविन को पत्र भी लिखा, परंतु गांधीजी द्वारा सहमति व समर्थन नहीं मिलने के कारण फाँसी टल न सकी। 1928 में आए साइमन कमीशन का इन्होने पुरजोर बहिष्कार किया और 1930 के नमक सत्याग्रह में भी बढ़-चढ़ कर भाग लिया। इसके फलस्वरूप मई, 1930 में इन्हें देहारादून जेल में डाल दिया गया।

ब्रिटिश भारत में वो दो बार संयुक्त प्रांत अर्थात यू.पी. के मुख्यमंत्री बने थे। पहली बार 17 जुलाई,1937-2 नवंबर, 1939 तक तथा पुन: 1 अप्रैल,1946-15 अगस्त, 1947 तक। भारत की आजादी के बाद जब 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ, तब स्वतंत्र भारत के संयुक्त प्रांत का नाम परिवर्तित कर उत्तर प्रदेश रखा गया। इस नवनामित उत्तरप्रदेश राज्य का मुख्यमंत्री एकबार पुन: सर्व सम्मति से इन्हें ही बनाया गया। 26 जनवरी, 1950-27 दिसंबर, 1954 तक ये उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत रहे। गृहमंत्री पद पर रहते हुए जब लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल का निधन हुआ तो इन्हें गृह मंत्रालय, भारत सरकार के प्रमुख की ज़िम्मेदारी दी गई। 2 मार्च, 1955-7 मार्च, 1961 तक ये भारत के चौथे गृहमंत्री रहे। गृहमंत्री पद पर रहते हुए ही 7 मार्च, 1961 को 73 वर्ष की आयु में इनका दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।

गृहमंत्री रहते हुए ही इन्होने भारत को भाषा के अनुसार राज्यों में बांटना और हिन्दी को राजभाषा के रूप में स्थापित करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए। इनके अतुलनीय योगदान को देखते हुए ही 1957 में भारत सरकार द्वारा इन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान भारतरत्न से सम्मानित किया गया। इनके नाम पर कई प्रसिद्ध स्मारक और संस्थान हैं-

1.   गोविंद वल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान, प्रयागराज, उत्तरप्रदेश

2.   गोविंद वल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्व विद्यालय, पंतनगर, उत्तराखंड

3.   गोविंद वल्लभ पंत अभियांत्रिकी महाविद्यालय, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड

4.   गोविंद वल्लभ पंत सागर, सोनभद्र, उत्तरप्रदेश

5.   पंडित गोविंद वल्लभ पंत इंटर कॉलेज, काशीपुर, ऊधमसिंह नगर, उत्तराखंड

इनके अलावा भी अनेक अस्पताल और शिक्षण संस्थाएं भी देशभर में कार्यरत हैं।



     

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